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मत कहो महामहिम राष्ट्रपति

मत कहो महामहिम राष्ट्रपति

दरभंगा. 2 अक्टूबर 2012

प्रणव मुखर्जी


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नहीं चाहते कि उनके लिये अंग्रेजों के जमाने में बनाये गये ‘महामहिम’ जैसे भारी-भरकम और दूसरों को दासता का बोध कराने वाले संबोधन इस्तेमाल किये जाएं. उनका कहना है कि उनके नाम के साथ ‘महामहिम’ या ‘माननीय’ के बजाये जरुरी होने पर श्री का इस्तेमाल किया जा सकता है.

गौरतलब है कि बिहार के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 3 अक्टूबर को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जा रहा है. इस समारोह का मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को बनाया गया है. जब इस समारोह के लिये निमंत्रण पत्र की बात आई तो प्रणव मुखर्जी ने अपने नाम से पहले ‘महामहिम’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति दर्ज कराई. उनका कहना था कि अब यह समय आ गया है कि हम सब औपनिवेशिक के बजाये लोकतांत्रिक शब्दों का इस्तेमाल करें.

जाहिर है, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की इस इच्छा के बाद उनके सचिवालय ने ‘महामहिम’ शब्द के बजाये ‘श्री’ शब्द का इस्तेमाल शुरु कर दिया है. इसके बाद आमंत्रण पत्र में बिहार के राज्यपाल देवानंद कुंवर के नाम के पहले लिखे गये ‘महामहिम’ शब्द को भी हटा दिया गया है. यहां तक कि राज्यपाल के नाम के आगे लिखा गया ‘माननीय’ शब्द भी हटा दिया गया है. राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से आये पत्र के दिशा निर्देश के अनुसार समारोह में प्रणव मुखर्जी के लिये अलग से विशेष तरह की कुर्सी नहीं लगाने के लिये कहा गया है. पत्र में मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों के लिये एक समान कुर्सी के इस्तेमाल की बात कही गई है.