पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

सोनिया के दामाद पर घोटाले का आरोप

सोनिया के दामाद पर घोटाले का आरोप

नई दिल्ली. 5 अक्टूबर 2012

रॉबर्ट वाड्रा


समाजसेवी अरविंद केजरीवाल और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी. तमाम दस्तावेजी सबूतों के साथ केजरीवाल और उनकी टीम ने आरोप लगाया कि रॉबर्ट वाड्रा ने 50 लाख की संपत्ति से केवल 3 साल में 300 करोड़ की संपत्ति बना ली.

अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों में रॉबर्ट वाड्रा ने एक के बाद एक 31 संपत्तियां खरीदी हैं जिसमें से अधिकांश दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में हैं. इन संपत्तियों को खरीदने में वाड्रा को करोड़ो रुपए चुकाने पड़े हैं.

आरोपों के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां ने पांच कंपनियों का गठन 1 नवंबर 2007 के बाद किया. उन कंपनियों के बही-खातों और ऑडिट रिपोर्ट से पता चलता है कि इन कंपनियों की कुल शेयर पूंजी मात्र 50 लाख रुपए थी. इन कंपनियों के पास आय का एकमात्र वैध स्रोत था डीएलएफ द्वारा मिला ब्याज मुक्त कर्ज. इसके अलावा इन कंपनियों की आय का कोई वैध स्रोत नहीं है.फिर भी 2007 से 2010 के दौरान इन कंपनियों ने 300 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित की जिसकी कीमत आज 500 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है.

रॉबर्ट वाड्रा को लेकर टीम केजरीवाल ने कहा कि इन कंपनियों ने जो जानकारी दी, उसके मुताबिक इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करने के लिए धन की व्यवस्था उन्होंने डीएलएफ लिमिटेड द्वारा मिले ब्याज मुक्त ऋण (65 करोड़ से अधिक) से ही की. इस संपत्ति का बड़ा हिस्सा डीएलएफ से ही खरीदा गया है लेकिन कीमतें बाजार भाव से बहुत कम पर दिखाई गई हैं. इस तरह डीएलएफ गुड़गांव के मैग्नोलिया अपार्टमेंट के 7 फ्लैट वाड्रा की कंपनियों ने कुल मात्र 5.2 करोड़ रुपए में खरीद लीं जबकि प्रत्येक फ्लैट का बाजार भाव खरीद के समय में 5 करोड़ से ऊपर था. आज एक-एक फ्लैट की कीमत 10-15 करोड़ रुपए तक जा पहुंची है.

आरोपों के अनुसार इसी तरह गुड़गांव के डीएलएफ अरालियाज आपार्टमेंट में 10,000 वर्ग फीट के एक फ्लैट की खरीद कीमत केवल 89 लाख रुपए दिखाई गई है जबकि खरीद के समय यानी 2010 में इसका बाजार भाव 20 करोड़ था जो आज 30 करोड़ तक जा पहुंचा है. इतना ही नहीं डीएलएफ ग्रुप के दिल्ली के साकेत में स्थित एक होटल (डीएलएफ हिल्टन गार्डेन इन) का 50 फीसदी शेयर की खरीद केवल 32 करोड़ में दिखाई जबकि इसका बाज़ार भाव 150 करोड़ से ऊपर था. इन संपत्तियों का ब्योरा और उनके अधिग्रहण से जुड़ी जानकारियां संलग्न नोट में है. यह नोट इन कंपनियों की बैलेंस शीट और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है जिसके लिए सूचनाएं रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के पास से जुटाई गई हैं.

सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुये अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की सत्ता पर काबिज एक राजनीतिक परिवार के दामाद द्वारा इतनी ज्यादा संपत्तियों का अधिग्रहण कई सवालों को जन्म देता है. डीएलएफ ने रॉबर्ट वाड्रा को इतना बड़ा ब्याज मुक्त कर्ज क्यों दिया होगा? केजरीवाल ने जानना चाहा कि डीएलएफ लिमिटेड वाड्रा को औने-पौने दाम पर अपनी संपत्तियां क्यों बेच रहा था जिसके लिए पैसे भी खुद डीएलएफ ही दे रहा था?

अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने आरोप लगाया कि हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने डीएलएफ को गुड़गांव में मैग्नोलिया प्रोजेक्ट (जिसमें सात अपार्टमेंट वाड्रा को मिले हैं) के लिए 350 एकड़ जमीन दी है. इसके अलावा भी डीएलएफ को कांग्रेस सरकारों ने हरियाणा और दिल्ली में कई और जमीनें तथा दूसरे फायदे पहुंचाए हैं. क्या वाड्रा को सैकड़ों करोड़ की इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन मुहैया कराकर, डीएलएफ कांग्रेस सरकार के अहसान चुका रहा था?

केजरीवाल ने जानना चाहा कि यह साफ है कि वाड्रा की इन संपत्तियों को हासिल करने में बेहिसाब काले धन का इस्तेमाल हुआ है. इस धन का स्रोत क्या है? क्या कांग्रेस पार्टी का काला पैसा सत्ताधारी दल के दामाद की अकूत सपत्तियां अर्जित करने में लगाया जा रहा है?

अन्ना हजारे के सहयोगी रहे अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि ऊपर बताई गई संपत्ति तो केवल उस संपत्ति का ब्योरा है जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जमा किए गए विवरण से प्रकाश में आया है औऱ यह तो एक छोटा सा नमूना भर हो सकता है. प्रारंभिक सूचना इस बात की ओर इशारा करती है कि ऐसी औऱ भी बहुत सी संपत्तियां होगीं जो इसी तरह हासिल की गई होंगी. यहां यह बताना भी जरूरी हो जाता है कि वाड्रा ने 2012 में छह नई कंपनियों का पंजीकरण कराया है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in