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किंगफिशर में सीईओ की बल्ले-बल्ले

किंगफिशर में सीईओ की बल्ले-बल्ले

नई दिल्ली. 8 अक्टूबर 2012

विजय माल्या


केंद्र सरकार जिस विजय माल्या और किंगफिशर की खस्ताहाली का रोना रो कर अनुदान देने पर आमादा थी, उस किंगफिशर कंपनी के सीईओ संजय अग्रवाल को सर्वाधिक सालाना पैकेज मिलता है. हालत ये है कि अधनंगी कैलेंडर छपवाने और क्रिकेट मैचों में अरबों लुटाने वाले विजय माल्या की कंपनी के छोटे कर्मचारी भले महीनों वेतन नहीं मिलने के कारण आत्महत्या कर रहे हों औऱ हड़ताल कर रहे हों, लेकिन उनकी कंपनी के बड़े अधिकारी मोटी पगार और सुविधाएं पा कर मजे में हैं. साल दर साल इन सीईओ का पैकेज दुगना-तिगुना हो रहा है. विजय माल्या की यूबी ग्रुप के सभी सीईओ की तनख्वाह लगातार बढ़ती चली गई है.

गौरतलब है कि वेतन के मामले में पिछले 2 सालों से किंगफिशर अपनी हालत का रोना रोती रही है और एक समय तो केंद्र सरकार किंगफिशर के मालिक विजय माल्या को अपनी नाक का बाल बना कर किसी भी तरह मोटा अनुदान देने पर आमादा थी. लेकिन इस खस्ताहाल कंपनी की हकीकत ये है कि इसके सीईओ संजय अग्रवाल को पिछले साल के 2.12 करोड़ के मुकाबले 4.01 करोड़ का पैकेज दिया जा रहा है. दूसरी ओर किंगफिशर एयरलाइन के कर्मचारी महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर हैं. कंपनी प्रबंधन ने खुद ही खस्ताहाली का रोना रो कर आंशिक तालाबंदी घोषित कर रखी है.

वार्षिक लेखाजोखा के अमुसार मार्च 2012 में समाप्त हुये वित्त वर्ष के दौरान संजय अग्रवाल विमानन क्षेत्र में दूसरे सबसे ज्यादा पैकेज वाले सीईओ बन गये हैं. विजय माल्या को भी 1.43 करोड़ रुपये केवल सिटिंग फीस के तौर पर दी गई है. दूसरी ओर कंपनी के कर्मचारी पिछले कई महीने से तनख्वाह नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर हैं.

इधर नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि किंगफिशर एयरलाइंस को उसकी सेवाएं शुरू करने की अनुमति तभी दी जाएगी जब वह अपनी योजना का ब्यौरा डीजीसीए के पास जमा कराएगी. उन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस को लायसेंस रद्द करने का नोटिस दिये जाने को लेकर कहा है कि सारा काम नियम से हो रहा है और किंगफिशर एयरलाइंस को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कोई फैसला नहीं लिया गया है.


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