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टैक्स देना मौलिक कर्तव्य होगा

टैक्स देना मौलिक कर्तव्य होगा

नई दिल्ली. 15 अक्टूबर 2012

टैक्स आयकर


अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो आने वाले दिनों में आयकर यानी इंकम टैक्स देने को मौलिक कर्तव्य में शामिल किया जा सकता है. कहा जा रहा है कि मंत्रीमंडल इस मुद्दे पर जल्दी ही निर्णय लेगा, जिसके बाद संविधान संशोधन कर के इंकम टैक्स देने को मौलिक कर्तव्य की श्रेणी में शामिल कर लिया जाएगा.

गौरतलब है कि जब एक व्यक्ति की कुल आय सभी स्रोतों से मिलाकर अधिकतम अनुमत राशि से अधिक हो जाती है जिस पर सरकार द्वारा आयकर पर देय नहीं है, तब उस व्यक्ति को आयकर विवरणी भरने का दायित्व होता है. आयकर की धारा 139 (1) अधिक व्यक्तियों को कर के दायरे में आने के विचार से कुछ वर्ष पहले संशोधित की गई थी. अब यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित 6 शर्तों में से कोई एक पूरी करता हो-वाहन का स्वामी हो, एक अचल संपत्ति के निर्दिष्ट तल क्षेत्रफल का स्वामित्व रखता हो, अपने लिए अथवा किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा का व्यय उठाता हो, एक टेलीफोन का उपयोग करता हो,क्रेडिट कार्ड का उपयोग करता हो, क्लब का सदस्य हो तब उसे आयकर विवरणी जमा करनी होती है.

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से नवभारत टाइम्स ने दावा किया है कि संविधान में कई चीजों को मौलिक कर्तव्य के रूप में शामिल किया गया है. इसमें टैक्स पेमेंट को भी जोड़ने पर विचार चल रहा है. भारत का टैक्स जीडीपी रेशियो 2011-12 में घटकर 10.1 फीसदी रह गया था. 2007-08 में यह 11.9 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर था.

इस संबंध में टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह सांकेतिक कदम है. इसका मकदस जागरूकता बढ़ाना है. टैक्स को मौलिक कर्तव्यों में शामिल करने से यह समझाने में मदद मिलेगी कि टैक्स देना क्यों जरूरी है? संविधान में 40 वें संशोधन के तहत 10 मौलिक कर्तव्यों की बात कही गई है.


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