पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >मध्य Print | Share This  

दिग्विजय के घोटाले का कोड वर्ड था X 299

दिग्विजय के घोटाले का कोड वर्ड था X 299

इंदौर. 19 अक्टूबर 2012

दिग्विजय सिंह


कांग्रेस के बड़बोले महासचिव दिग्विजय सिंह के खिलाफ करोड़ो रुपये के इंदौर के एमजी रोड स्थित ट्रेजर आईलैंड ज़मीन घोटाले में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है. इंदौर के एमजी रोड पर मनीष कालानी की एक लाख वर्गफीट जमीन को लेकर यह घोटाला हुआ था, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था. दिग्विजय सिंह पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते इसका आवासीय उपयोग बदलकर व्यावसायिक किया था.

मध्यप्रदेश उच्च नयायालय की इंदौर खंडपीठ ने इस ज़मीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व आवास मंत्री चौधरी राकेश सिंह, तत्कालीन मुख्य सचिव एवी सिंह, तत्कालीन संयुक्त संचालक इंदौर वीपी कुलश्रेष्ठ, मनीष कालानी के पिता प्रेम कालानी व उनकी मां पद्मा के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिये हैं. कोर्ट ने 6 महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है. एक पूर्व पार्षद महेश गर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुये न्यायमूर्ति पीके जायसवाल एवं एमसी गर्ग की पीठ ने गुरुवार को उक्त आदेश दिया.

अदालत ने जांच के पांच बिंदू निर्धारित किये हैं. इसके अनुसार सीबीआई को जांच कर के बताना है कि ईओडब्ल्यू जांच में तत्कालीन अवर सचिव ने कहा था कि जिन फाइलों को प्राथमिकता से निपटाना हो, उन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह कोड वर्ड (एक्स-299) लिख देते थे. क्या टीआई मामले में भू उपयोग बदलने के लिए फाइल पर यह कोड वर्ड था?

अदालत ने सीबीआई से जानना चाहा है कि कोड वर्ड पालन में अफसरों की क्या भूमिका थी? अदालत ने जांच में यह भी पता लगाने के लिये कहा है कि एमजी रोड पर बड़ा गणपति से रीगल तक एफएआर 2.5 व रीगल से पलासिया तक एफएआर 1.5 है. टीआई रीगल-पलासिया के बीच क्या एफएआर 2.5 बता दिया गया था?

हाईकोर्ट ने जांच के दायरे में इस बात को शामिल करने के लिये कहा है कि निजी मामले में भू-उपयोग किस दबाव में बदला? इसके अलावा मल्टीप्लेक्स निर्माण के लिए एमपी हाउसिंग बोर्ड व मनीष कालानी के बीच एमओयू साइन हुआ था. इसमें 51 प्रतिशत शेयर हाउसिंग बोर्ड को मिलते. वह एमओयू किस आधार पर निरस्त कर दिया?


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in