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विनायक सेन को जमानत मिली

विनायक सेन को जमानत मिली

नई दिल्ली. 25 मई 2009

 

पिछले 2 सालों से नक्सलियों से संबंध होने के आरोप में रायपुर जेल में बंद विनायक सेन को जमानत मिल गई है. सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया. विनायक सेन की जमानत याचिका पर उनकी ओर से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने 4 मई को बहस की थी.

मानवाधिकार संगठन, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ पीयूसीएल के उपाध्यक्ष विनायक सेन को 14 मई 2007 में नक्सलियों की मदद करने के आरोप में छत्तीसगढ़ पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. उन पर पोटा और टाडा के समकक्ष छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा कानून के तहत मुकदमा चलाया जा रहा था और उनकी जमानत याचिका कई बार खारिज की जा चुकी थी.

दुनिया भर में विनायक सेन को रिहा करने के लिए आंदोलन चलाए जा रहे थे. मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोगों के अलावा कई नोबल पुरस्कार विजेता, लेखक, पत्रकार भी विनायक सेन की रिहाई की लगातार मांग कर रहे थे.

इससे पहले 4 मई को वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी द्वारा जमानत याचिका पर बहस के बाद न्यायमूर्ति डी. के. जैन और न्यायमूर्ति बी. एस. रेड्डी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा था. राज्य शासन के जवाब के बाद आज न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू और दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सरकारी वकील का पक्ष सुने बिना ही विनायक सेन को जमानत दे दी.