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सैन्य खरीद में सौ करोड़ की गड़बड़ी

सैन्य खरीद में सौ करोड़ की गड़बड़ी

नई दिल्ली. 24 अक्टूबर 2012

indian army artillery


रक्षा मंत्रालय की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि पूर्व सेना प्रमुखों ने गैरजरूरी उपकरणों की खरीदी में 100 करोड़ की फिज़ूलखर्ची की है. रिपोर्ट में यह बात सामने आने के बाद रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने इस बात को बहुत गंभीरता से लिया है और खर्चों पर सख्त नियंत्रण और संतुलन रखने का आदेश दिया है. हालांकि इस मामले में सेना मुख्यालय ने कहा है कि कमांड स्तर पर खरीद के ये सभी फैसले निर्धारित प्रक्रिया व नियमों के मुताबिक लिए गए हैं.

इस रिपोर्ट के मुताबिक आर्मी चीफ जनरल बिक्रम सिंह, पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह और दूसरे कमाडरों ने उपकरणों की इमरजेंसी खरीद के लिए अपने विशेषाधिकार का बेजा इस्तेमाल किया जिससे सरकार को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनावश्यक चपत लगी. रिपोर्ट में बताया गया है कि इन सेना प्रमुखों ने सेना के लिए चीनी संचार उपकरण खरीदे. इन उपकरणों को सीधे कंपनी से खरीदने के बजाय उसके दलालों से खरीदा गया, जबकि कंपनी के मूल अफसर भारत में ही मौजूद थे.

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि ये सिर्फ पैसों की फिज़ूलखर्ची का मामला नहीं है बल्कि नियमों की अनदेखी का भी है. अगर ये उपकरण भारत में कंपनी से सीधे खरीदे जाते तो पैसों को बचाया जा सकता था. रिपोर्ट में यह भी बताया है कि आर्मी हेडक्वाटर ने जिन बुलेटप्रूफ जैकेटों को खराब खराब क्वॉलिटी का बताकर रिजेक्ट कर दिया था उसे नॉर्दर्न कमांड ने खरीद लिया. इतना ही नहीं जांच के दौरान पाया गया कि चीन से खरीदे गए उपकरणों में जासूसी करने वाला सॉफ्टवेयर भी फिट किया गया था, जो कि देश की सुरक्षा के लिए बहुत खतरनाक हो सकता था.

यह रिपोर्ट सामने आने के बाद रक्षामंत्रा ए.के.एंटनी ने निर्देश दिया है कि अब से ना के आला अफसरों को किसी खरीद से पहले मंत्रालय की मंजूरी लेनी जरूरी होगी.