पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >अंतराष्ट्रीय >पाकिस्तान Print | Share This  

स्वस्थ होकर पाकिस्तान लौटेगी मलाला

स्वस्थ होकर पाकिस्तान लौटेगी मलाला

लंदन. 26 अक्टूबर 2012

 

तालिबान के आतंकी हमले की शिकार मलाला युसुफज़ई के पिता जियाउद्दीन युसुफज़ई का कहना है कि पूरी तरह से ठीक होने के बाद मलाला अपने देश पाकिस्तान वापस जाएगी. मलाला पर फिर से संभव आतंकी हमले के मद्देनज़र विदेश में शरण मांगने की बात को नकारते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि मलाला पर फिर से हमला किए जाने की धमकियां मिल रही हैं लेकिन वे फिर भी पाकिस्तान ही वापस जाएंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी और उनकी बेटी की कुरबानियों का मकसद इतना छोटा नहीं कि वे किसी और देश की शरण में जाकर अपनी तमाम जिंदगी वहां बिता दें.

गौरतलब है कि 14 वर्षीय मलाला हुसुफज़ई को 10 अक्टूबर को पाकिस्तान की स्वात घाटी के मुख्य शहर मिंगोरा में तालिबानी आतंकियों ने स्कूल से घर वापस लौटते वक्त सिर में गोली मार दी थी. घायल मलाला को पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन बाद में 14 अक्टूबर को उसे इंग्लैंड के बर्मिंघम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां फिलहाल उसकी हालत पहले से बहुत बेहतर बताई जा रही है. अभी मलाला के पिता जियाउद्दीन उससे मिलने के लिए इंग्लैंड पहुँचे हुए हैं.

मलाला पहली बार सुर्खियों में वर्ष 2009 में आईं जब 11 साल की उम्र में उन्होंने तालिबान के साए में ज़िंदगी के बारे में डायरी लिखना शुरु किया. इसके लिए उन्हें वर्ष 2011 में बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. मलाला शुरु से ही अपने इलाके में तालिबान की गतिविधियों की मुखर विरोधी है, इसीलिए वह तालिबान के निशाने पर भी रही है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Rajiv Anand [rajivanand71@gmail.com] Giridih, Jharkhand - 2012-10-26 18:50:25

 
  कोई माने या ना माने पर मैं मानता हूं कि मलाला हम लोगों की लक्ष्मीबाई से कम नहीं है. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in