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जमीन खरीद मामले में राबर्ट वाड्रा को राहत

जमीन खरीद मामले में राबर्ट वाड्रा को राहत

चंडीगढ़. 26 अक्टूबर 2012

Robert Vadra


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा को जमीन खरीद मामले में क्लीन चिट मिल गई है. हरियाणा के चार जिलों गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात और पलवल के उपायुक्तों ने अपनी जाँच रिपोर्ट में कहा है कि राबर्ट वाड्रा की कंपनी द्वारा इन जिलों में जमीन खरीदी के दौरान कोई अनियमितता नहीं बरती गई है. हरियाणा के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन को भेजी गई रिपोर्ट में इन चारों जिलों के उपायुक्तों ने कहा है कि वाड्रा की कंपनी के द्वारा जमीन सौदों की रजिस्ट्री सरकारी सर्किल रेट के मुताबिक कराई गई है तथा इन सभी सौदों में स्टाम्प ड्यूटी का पूरा भुगतान किया गया है, इसलिए इनमें राजस्व की कोई हानि नहीं हुई है.

इस रिपोर्ट पर राज्य के पूर्व चकबंदी महानिदेशक अशोक खेमका ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से सही नहीं है और इसमें वाड्रा को बचाने की कोशिश की जा रही है. गौरतलब है कि खेमका ही वे अधिकारी हैं जिन्होंने रियल्टी कंपनी डीएलएफ के साथ हुये रॉबर्ट वाड्रा के गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल और मेवात जिलों की विवादास्पद जमीनों के सौदे की जांच का आदेश दिया था. हालांकि खेमका के इस आदेश दिए जाने के तुरंत बाद हरियाणा सरकार द्वारा उनका तबादला कर दिया गया था.

इस रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट हुआ है कि वाड्रा की कंपनी ने 2005 के बाद से हरियाणा में अब तक करीब 200 एकड़ जमीन खरीदी है. सूत्रों के अनुसार हरियाणा के डिप्टी कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में वाड्रा की कंपनियों द्वारा तयशुदा से ज्यादा स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान की बात तो कही है, लेकिन वाड्रा से अधिक स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान क्यों किया, इसकी वजह नहीं बताई गई है.

उल्लेखनीय है कि राबर्ड वाड्रा पर जमीन खरीदी सौदों में भ्रष्टाचार करने के आरोप इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अऱविंद केजरीवाल और हरियाणा में विपक्ष के नेता ओमप्रकाश चौटाला द्वारा लगाए गए थे, जिसके बाद ये मुद्दा सुर्खियों में आया था. लेकिन इस रिपोर्ट के बाद वाड़्रा को इन आरोपों से राहत मिलती दिख रही है.


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