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कांडा की जमानत पर सुनवाई

कांडा की जमानत पर सुनवाई

नई दिल्ली. 2 नवंबर 2012

गोपाल कांडा


एयर होस्टेस गीतिका शर्मा की खुदकुशी के मामले में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होने की उम्मीद है. कांडा की जमानत याचिका में कहा गया है कि उन्हें राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है.कांडा की ओर से गुरुवार को हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी.

गौरतलब है कि एमडीएलआर एयरलाइंस में एयर होस्टेस रह चुकी 23 साल की गीतिका शर्मा ने दिल्ली के अशोक विहार स्थित अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी. उसके कमरे से मिले सुसाइड नोट में उसने एमडीएलआर एयरलाइंस के अध्यक्ष और हरियाणा सरकार में गृह राज्यमंत्री गोपाल कांडा को इसके लिये जिम्मेवार बताया था. गीतिका शर्मा एमडीएलआर एयरलाइंस के बंद होने के बाद गोपाल कांडा के ही उपक्रम में काम करती थी. अपने सुसाइड नोट में गीतिका ने कहा है कि उसने यानी कांडा ने मेरा विश्वास तोड़ा है. गीतिका के घरवालों का आरोप है कि गोपाल कांडा ने दीपिका को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.

इधर पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किये गये गोपाल कांडा के कथित बयान में बताया गया कि गोपाल कांडा किसी भी तरह से गीतिका को किसी और के साथ बर्दाश्त नहीं कर सकते थे.

एमडीएलआर एयरलाइंस के मालिक और मंत्री गोपाल कांडा के इस बयान के अनुसार एमडीएलआर एयरलाइंस के लिए केबिन क्रू के इंटरव्यू में जब गीतिका आई थी, उसी समय कांडा ने कहा था कि उसे 6 महीने तक ट्रेनिंग दो, तब तक वह 18 साल की हो जाएगी. इसके बाद उसे ट्रेनी कैबिन क्रू का अपॉइंटमेंट लेटर दे दिया गया. मुझे गीतिका बेहद पसंद थी इसलिए मैंने जल्द ही उसे अगस्त 2008 में सीनियर कैबिन क्रू मेंबर बना दिया.

पुलिस द्वारा पेश गोपाल कांडा के इस बयान के अनुसार 2009 में एयरलाइंस के बंद होने के बाद कांडा ने गीतिका को एमडीएलआर ग्रुप ऑफ कंपनीज़ का ग्रुप कोऑर्डिनेटर बना दिया. कांडा ने पुलिस को कथित रुप से बताया कि गीतिका मुझे हर शाम को डेली रिपोर्ट देती थी. रोज मिलने की वजह से हम पास आते गए. मैं गीतिका की तरफ खिंचता गया. एयरलाइन के ठप होने के बाद जब भी गीतिका कंपनी छोड़ने की बात करती, मैं उसे अपने ऑफिस में रखने के लिए उसकी सैलरी बढ़ा देता और उसे प्रमोट कर देता.

इस बयान के अनुसार 2010 में गीतिका चली गई लेकिन उसके कागजात कंपनी में ही थे. उसने कांडा से कई बार कागजात मांगे लेकिन कांडा उसे छोड़ना नहीं चाहता था. उन्होंने कंपनी में निर्देश दिया था कि न तो उसके कागजात लौटाए जाएं और न ही उसे एनओसी दिया जाए.

गोपाल कांडा ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि जब उसने कंपनी छोड़ी तो मैंने फिल्मी अंदाज में उसे दुबई से यहां आने के लिये बाध्य कर दिया. जब यहां आ कर उसने कंपनी नहीं ज्वाइन की तो मैंने उसे धमकाया. वह अपने परिवार को लेकर बहुत चिंतित हो गई और मेरी कंपनी जॉइन कर ली. मैंने गीतिका को 60 हजार रुपए की सैलरी के साथ डायरेक्टर बना दिया. मैंने पहले उसे होंडा सिटी और बाद में बीएमडब्ल्यू कार ड्राइवर के साथ दी. मार्च 2011 में मैंने अशोक विहार में अपनी बेटी के नाम एक फ्लैट खरीदकर गीतिका को दे दिया. मैंने एक बार फिर उसके नजदीक जाने की कोशिश की लेकिन उसने ऑफिस आना बंद कर दिया. मैंने उसे मनाने की कोशिश की लेकिन उसने अरुणा और मेरा फोन रिसीव करना बंद कर दिया.

गीतिका को लेकर जो बयान गोपाल कांडा ने पुलिस को दिया है, उसके अनुसार वह गीतिका को सबक सिखाना चाहता था. अरुणा और कांडा ने गीतिका की मां को उनकी ऐक्टिविटीज़ के बारे में बताकर सवाल खड़े किए. गोपाल कांडा ने सोचा कि इससे गीतिका के पास और कोई ऑप्शन नहीं बचेगा, सिवाय इसके कि वह गोपाल कांडा के पास लौट आए. लेकिन इसके बाद गीतिका ने आत्महत्या कर ली.


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