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प्रख्यात लेखिका कमला सुरैया का निधन

प्रख्यात लेखिका कमला सुरैया का निधन

पुणे. 1 जून 2009

 

अंग्रेजी और मलयालम की प्रख्यात लेखिका कमला सुरैया का रविवार तड़के पुणे के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. 75 वर्षीय सुरैया को कुछ दिनों से सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी. उनके परिवार में तीन पुत्र हैं. उन्हें मंगलवार को तिरुवनंतपुरम की पालायल मस्जिद के कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्दे खाक किया जाएगा.

कमला सुरैया ने अंग्रेजी और मलयालम में कई कालजयी रचनाएं लिखीं. वे कविताओं और कहानियों पर समान रूप से अधिकार रखती थीं. अंग्रेजी में कविताओं और कहानियों के अलावा उन्होंने अपनी मातृघाषा मलयालम में माधवीकुट्टी के नाम से कई लघु कथाएं भी लिखीं. साहित्य जगत में उनका नाम उनके पहले कविता संग्रह “समर इन कलकत्ता" से सुर्खियों में आया.

लेकिन उनकी उनकी सबसे चर्चित और विवादास्पद रचना उनकी आत्मकथा "माई स्टोरी" रही. इस किताब में उन्होंने स्त्री पुरूष संबधों, विवाह और इसके दायरे से बाहर के रिश्तों की वस्तुपरकता की खोजबीन की है. उन पर इस किताब में विवाहोत्तर संबंधों को सही ठहराने के आरोप भी लगे. बाद में इस किताब का अनुवाद 15 भाषाओं में किया गया.

1999 में इस्लाम धर्म कबूलने से पहले उन्हें कमला दास के नाम से जाना जाता था. उनके बयान “मैंने कृष्ण को अल्लाह में रूपांतरित कर दिया” पर काफी विवाद खड़ा हुआ था.

कमला सुरैया को अपने लेखन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, एसियन पोएट्री प्राइज़, केंड अवार्ड फ़ॉर इंग्लिश राइटिंग फ़्रॉम एसियन कंट्रीज जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त हुए.


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