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नायपाल पर क्यों भड़के गिरीश कर्नाड

नायपाल पर क्यों भड़के गिरीश कर्नाड

मुंबई. 4 नवंबर 2012

गिरीश कर्नाड


वी एस नायपॉल के खिलाफ फिल्मकार और रंगकर्मी गिरीश कर्नाड की टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है. कई रंगकर्मियों और लेखकों ने जहां इस पर कर्नाड के साथ सहमति जताई है, वहीं असहमति जताने वालों की भी कमी नहीं है.

गौरतलब है कि मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में गिरीश कर्नाड ने वी एस नायपॉल को लेकर टिप्पणी की थी कि नायपॉल को भारतीय इतिहास में मुसलमानों के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में कुछ भी नहीं पता है. कर्नाड ने यह भी कहा था कि सम-सामयिक मुद्दों पर नायपॉल एक गैर भरोसेमंद लेखक हैं. इस आयोजन में नायपॉल को सम्मानित किया गया था, जिसके बाद गिरीश कर्नाड इस निर्णय पर भड़के.

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद भाजपा कार्यालय जाने वाले वी एस नायपॉल को लेकर गिरीश कर्नाड ने कहा कि हमारे रोजमर्रा के अस्तित्व में संगीत का बड़ा योगदान है. सड़क, रेस्त्रां, या कहीं भी आपको संगीत मिल जाएगा.. अब तक नायपॉल भारत पर तीन किताबें लिख चुके हैं. उनमें कहीं भी आपको संगीत का जिक्र नहीं मिलेगा. इससे पता चलता है कि उन्हें संगीत की कद्र ही नहीं है.

इस मुद्दे पर जब नायपॉल के समर्थकों ने गिरीश कर्नाड की आलोचना की तो कर्नाड ने एक बार फिर अपने बयान को दुहराया और कहा कि मैं अपने बयान पर कायम हूं.

इधर बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी वी एस नायपॉल को मुस्लिम विरोधी करार देते हुये कहा है कि अगर नायपॉल अपनी किताबें किसी भारतीय भाषा में लिखते तो उन्हें कभी कोई जान भी नहीं पाता.

दूसरी ओर वी एस नायपॉल ने कहा है कि उन्होंने भारत पर चार किताबें, दो उपन्यास और बड़ी संख्या में लेख लिखे हैं. इसके बाद अब कम से कम भारत पर लिखने की मेरी कोई इच्छा नहीं है.


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