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ताज कॉरिडोर में मायावती को राहत

ताज कॉरिडोर में मायावती को राहत

लखनऊ. 5 नवंबर 2012


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती को बहुचर्चित ताज कॉरिडोर मामले में राहत देते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा शुरु करने की मांग संबंधी सभी जनहित याचिकाएं खारिज कर दी हैं. उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने इस मामले में मायावती के कैबिनेट सहयोगी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ भी याचिकाओं को खारिज कर दिया. इस मामले में मायावती पर 175 करोड़ रुपयों के घोटाले के आरोप लगे थे.

मायावती के वकील सतीश मिश्रा के अनुसार न्यायालय ने मेरिट के आधार पर इस केस को खारिज कर दिया. न्यायालय के आदेश के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए मिश्रा ने कहा कि जो सात जनहित याचिकाएं इस मामले में दाखिल की गई थीं वे सभी राजनीतिक द्वेष से की गई थीं. उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए फैसलों की भी जानकारी ली और उसके बाद यह फैसला सुनाया है.

उल्लेखनीय है कि ताज कॉरिडोर मामला सबसे पहले 2002 में सुर्खियों में आया जब आगरा के ताजमहल के पास हो रहे निर्माण को लेकर आपत्ति हुई थी. उस समय इस निर्माण की वैधता और इसमें संभावित भ्रष्टाचार के कारण ये मामला बहुचर्चित रहा. इसकी जाँच करते हुए सीबीआई ने मायावती समेत उनकी सरकार के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर मुकदमा चालने के लिए चार्जशीट दाखिल की थी. लेकिन जून 2007 में राज्य के तत्कालीन राज्यपाल टीवी राजेश्वर राव ने मायावती पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मामला खारिज कर दिया था.

इसके बाद उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिकाओं में राज्यपाल के निर्णय को चुनौती दी थी और मायावती और राज्य के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने की मांग की थी लेकिन आज उच्च न्यायालय ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया.


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