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बाल ठाकरे के बाद शिव सेना

बाल ठाकरे के बाद शिव सेना

मुंबई. 15 नवंबर 2012

बाल ठाकरे


अपने तीखे बयानों के लिये चर्चित शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को लेकर शिव सेना के उनके समर्थकों में दुख और शोक व्याप्त है. 86 साल के बाल ठाकरे पिछले कुछ महीनों से बेहद बीमार चल रहे थे. हालांकि उनकी ओर से चार दिन पहले ही यह खंडन आया था कि वे वे अस्वस्थ ज़रुर हैं लेकिन वेंटिलेटर पर नहीं हैं. अब उनके समर्थकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके बाद शिव सेना का क्या होगा. राजनीतिक गलियारों में भी अब एक ही चर्चा है कि क्या महाराष्ट्र नव निर्माण सेना चलाने वाले राज ठाकरे की फिर से शिव सेना में वापसी होगी या राज और उद्दव की तलवारें आपस में तनी रहेंगी?

बाल ठाकरे के अस्वस्थ होने की खबर पहली बार 25 जुलाई को आई थी, इसके बाद इसी महीने दशहरा के अवसर पर बाल ठाकरे के बुरी तरह से अस्वस्थ होने की खबर उस समय पुष्ट हुई, जब उनका रिकार्डेड संदेश उनके समर्थकों को सुनाया गया. इस संदेश में बाल ठाकरे ने कहा था कि लोगों को शिवसेना के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखनी चाहिए. आपने मेरा ध्यान रखा, अब उद्धव और आदित्य का ध्यान रखिए. उन्हें आप पर थोपा नहीं गया है. शिवसेना, गांधी परिवार की तरह नहीं है.

इस संदेश में बाल ठाकरे ने अपनी खराब हालत को लेकर टिप्पणी की थी कि मैं चल भी नहीं सकता हूं. बोलते समय मेरी सांस फूल जाती है. मेरी बिगड़ती तबीयत के बावजूद मेरा दिल आपके साथ है, मैंने अपना दिल किसी को नहीं दिया, वो आपके पास ही है. मराठी संस्कृति के नाम पर दूसरी भाषाओं और खास कर बिहारियों के खिलाफ आग उगलने वाले बाल ठाकरे ने कहा था कि शिवसेना ने मराठी हितों को तिलांजलि नहीं दी है. ये हमारी बुनियाद है.

23 जनवरी 1926 को मध्यप्रदेश के बालाघाट में जन्में बाल ठाकरे ने अपना करियर फ्री प्रेस जर्नल में बतौर कार्टूनिस्ट शुरु किया था. इसके बाद उन्होंने 1960 में अपने भाई के साथ एक कार्टून साप्ताहिक 'मार्मिक' की भी शुरुवात की. 1966 में उन्होंने महाराष्ट्र में शिव सेना नामक कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी संगठन की स्थापना की. हालांकि शुरुवाती दौर में बाल ठाकरे को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई लेकिन अपनी उम्र के अंतिम दौर में उन्होंने शिव सेना को सत्ता की सीढ़ियों पर पहुंचा ही दिया.

1995 में भाजपा-शिवसेना के गठबंधन ने महाराष्ट्र में अपनी सरकार बनाई. हालांकि 2005 में उनके बेटे उद्धव ठाकरे को अतिरिक्त महत्व दिये जाने से नाराज उनके भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी और 2006 में अपनी नई पार्टी 'महाराष्ट्र नव निर्माण सेना' बना ली. बाल ठाकरे अपने उत्तेजित करने वाले बयानों के लिये जाने जाते थे और इसके कारण उनके खिलाफ सैकड़ों की संख्या में मुकदमे दर्ज किये गये थे.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

JITENDRA [j.kataria28@gmail.com] SURAT - 2012-11-20 10:13:24

 
  I have so much respect for Balasaheb Thakrey. I am inspired with his life. I got more suggestions with his life. I getting confidence in my life when i remember him. 
   
 

megha [meghatomar89@gmail.com] meerut - 2012-11-17 14:52:58

 
  आपका न्यूज़पोर्टल वाकई महान है. मैं आईएएस की तैयारी कर रही हूं. तैयारी करने में आपका पोर्टल मुझे बहुत मदद करता है. ये मुझे अपडे़ट रखता है. और क्यों, कब, कैसा कि भी जानकारी देता है. मैं आईएएस के सब विद्यार्थियों को कहना चाहती हूं कि वे तैयारी करने के लिए द हिंदू और रविवार हमेशा पढ़ें. 
   
 

palash vaidya [pa8817384619@gmal.com] bhilai - 2012-11-16 11:58:35

 
  Great man. 
   
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