पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >समाज Print | Share This  

गर्भपात पर मौत के बाद बदलेगा कानून?

गर्भपात पर मौत के बाद बदलेगा कानून?

लंदन. 15 नवंबर 2012

सविता हलप्पनवार


गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने से भारतीय मूल की डेंटिस्ट सविता हलप्पनवार की आयरलैंड के अस्पताल में हुई मौत के बाद अब आयरलैंड के गर्भपात कानून को लेकर बहस तेज हो गई है. देश में इस कानून के खिलाफ 600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने आयरलैंड संसद की तरफ मार्च किया. इस दौरान उनके हाथों में सविता के तस्वीरों वाले बैनर थे. ये लोग मांग कर रहे थे कि देश में अबॉर्शन को लेकर कानून को बदला जाये. 31 वर्षीय सविता हलप्पनवार की 28 अक्टूबर को उस समय मौत हो गई थी, जब चिकित्सकों ने उनका गर्भपात करने से इंकार कर दिया. परिवार वालों के अनुरोध के बाद भी कानून का हवाला देकर उनका गर्भपात नहीं किया गया और गर्भ में घाव के सड़ने की वजह से उनकी मौत हो गई.

सविता हलप्पनवार के पति प्रवीण हलप्पनवार का कहना है कि यूनिवर्सिटी अस्पतॉल गॉलवे में जब हम 17 सप्ताह की गर्भवती सविता को लेकर आये तो उनकी स्थिति खराब होने लगी थी. यह भ्रूण में किसी तरह की गड़बड़ी के कारण था. हमने चिकित्सकों को कहा कि सविता का गर्भपात कर दें लेकिन चिकित्सकों ने कैथोलिक देश के कानून का हवाला देते हुये ऐसा करने से मना कर दिया.

गौरतलब है कि लगभग 20 साल पहले 'एक्स केस' का मामला सामने आने के बाद गर्भपात पर आयरलैंड में रोक लगा दी गई थी. इस मामले में स्कूल में पढ़ने वाली 14 साल की एक बच्ची बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई थी. बच्ची और उसके परिजन चाहते थे कि उसका गर्भपात करा दिया जाये. लेकिन आयरलैंड के स्थानीय प्रशासन ने गर्भपात की अनुमति नहीं दी. बाद में उस बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी. इस घटना के बाद अदालत ने कहा कि मां और भ्रूण दोनों को जिंदा रहने का समान अधिकार है लेकिन अगर मामला आत्महत्या तक पहुंच जाये तो गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिये.

अब सविता हलप्पनवार की मौत के बाद एक बार फिर गर्भपात के कानून को लेकर देश भर में बहस शुरु हो गई है. मानवाधिकार और महिला संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे. सरकार को यह बताना चाहिये कि किन परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है. कुछ संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी किया है. इधर प्रधानमंत्री इनडा केनी ने कहा है कि हम सविता हलप्पनवार की मौत की जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हम गर्भपात के मुद्दे पर किसी कदम से इनकार नहीं कर रहे लेकिन अभी तो जांच चल रही है.

दूसरी ओर भारत में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा है कि सविता हलप्पानवार की त्रासद मौत पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हैं. किसी भारतीय नागरिक की ऐसी परिस्थिति में मौत चिंता का विषय है. डबलिन में हमारा उच्चायोग इस मामले में करीबी नजर रखे हुए हैं. अकबरूद्दीन ने कहा कि हम समझते हैं कि आयरलैण्ड के अधिकारियों ने दो जांच के आदेश दिए है. हम इनके परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in