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इस अंक में

 

मोटापा की चिंता में दुबलाती मप्र सरकार

चुनावी मसाले की सोंधी महक

यह सबके लिये चेतावनी है

थप्पड़ के नाम पर

ये कहां आ गये हम

साहित्य का ओपेरा संस्करण

तब तो मतलब है चुनाव आयोग का

मनमोहन सिंह को अब आई शर्म ?

भूमि-सुधार के अनसुलझे सवाल

जल, जंगल, जमीन, जिंदगी... सब बर्बाद !

बुरी नज़र वाले तेरा डैम फूल

लुप्त होने के कगार पर हैं असुर

यह सबके लिये चेतावनी है

मोटापा की चिंता में दुबलाती मप्र सरकार

चुनावी मसाले की सोंधी महक

आरटीआई के बारे में नहीं जानते हम

मैं आदमखोर नहीं था

रामकथा पर रार क्यों ?

आत्महत्या की फसल

 
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भारत में महंगाई दर शून्य से नीचे

भारत में महंगाई दर शून्य से नीचे

मुंबई. 18 जून 2009

भारत में महंगाई दर पिछले 32 साल में पहली बार ऋणात्मक हो गई हैं. 6 जून को खत्म हुए हफ्ते में महंगाई अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर -1.61 प्रतिशत दर्ज की गई. इस स्थिति को अपस्फीति कहा जाता है.

उससे पहले 1977-78 में भी एक बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी कि मुद्रास्फीति शून्य से भी नीचे आ गई थी. इसके साथ ही संभवतः भारत विश्व का इकलौता ऐसा देश बन गया है जहां मुद्रास्फीति शून्य से भी नीचे दर्ज की गई है.

अपस्फीति आमतौर पर बाजारों में अत्यधिक उधारी या धन की आपूर्ति में कमी से आ जाती है. इससे देश की अर्तव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना है. इधर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी अपस्फीति के होने में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है और इसकी संभावना कई दिनों से महसूस की जा रही थी. उनका मानना है कि यह एक अस्थाई बदलाव है और बाजार में स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी.


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