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सविता की मौत का सच सामने आएगा

सविता की मौत का सच सामने आएगा

लंदन. 16 नवंबर 2012

सविता हलप्पनवार


आयरलैंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जेम्स रायली ने कहा है कि सविता हलप्पनवार की मौत की सच्चाई ज़रुर सामने आएगी और इसके लिये जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई भी होगी. रायली ने कहा कि हम ऐसी स्थिति में फंसे हैं, जहां जल्द से जल्द सवालों का जवाब ढूंढना जरूरी है, लेकिन जवाब ढूंढने में इतनी भी जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए कि हमें सचाई का पता ही नहीं चल सके. मैं चाहती हूं कि इन सवालों का जवाब ऐसा हो जो पूरी दुनिया के सामने मामले की सचाई पेश कर सके.

गौरतलब है कि गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने से भारतीय मूल की डेंटिस्ट सविता हलप्पनवार की आयरलैंड के अस्पताल में हुई मौत के बाद अब आयरलैंड के गर्भपात कानून को लेकर बहस तेज हो गई है. देश में इस कानून के खिलाफ 600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने आयरलैंड संसद की तरफ मार्च किया. इस दौरान उनके हाथों में सविता के तस्वीरों वाले बैनर थे. ये लोग मांग कर रहे थे कि देश में अबॉर्शन को लेकर कानून को बदला जाये. 31 वर्षीय सविता हलप्पनवार की 28 अक्टूबर को उस समय मौत हो गई थी, जब चिकित्सकों ने उनका गर्भपात करने से इंकार कर दिया. परिवार वालों के अनुरोध के बाद भी कानून का हवाला देकर उनका गर्भपात नहीं किया गया और गर्भ में घाव के सड़ने की वजह से उनकी मौत हो गई.

सविता हलप्पनवार के पति प्रवीण हलप्पनवार का कहना है कि यूनिवर्सिटी अस्पतॉल गॉलवे में जब हम 17 सप्ताह की गर्भवती सविता को लेकर आये तो उनकी स्थिति खराब होने लगी थी. यह भ्रूण में किसी तरह की गड़बड़ी के कारण था. हमने चिकित्सकों को कहा कि सविता का गर्भपात कर दें लेकिन चिकित्सकों ने कैथोलिक देश के कानून का हवाला देते हुये ऐसा करने से मना कर दिया.

लगभग 20 साल पहले 'एक्स केस' का मामला सामने आने के बाद गर्भपात पर आयरलैंड में रोक लगा दी गई थी. इस मामले में स्कूल में पढ़ने वाली 14 साल की एक बच्ची बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई थी. बच्ची और उसके परिजन चाहते थे कि उसका गर्भपात करा दिया जाये. लेकिन आयरलैंड के स्थानीय प्रशासन ने गर्भपात की अनुमति नहीं दी. बाद में उस बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी. इस घटना के बाद अदालत ने कहा कि मां और भ्रूण दोनों को जिंदा रहने का समान अधिकार है लेकिन अगर मामला आत्महत्या तक पहुंच जाये तो गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिये.

अब सविता हलप्पनवार की मौत के बाद एक बार फिर गर्भपात के कानून को लेकर देश भर में बहस शुरु हो गई है. मानवाधिकार और महिला संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे. सरकार को यह बताना चाहिये कि किन परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है. कुछ संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी किया है. इधर प्रधानमंत्री इनडा केनी ने कहा था कि हम सविता हलप्पनवार की मौत की जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हम गर्भपात के मुद्दे पर किसी कदम से इनकार नहीं कर रहे लेकिन अभी तो जांच चल रही है.

दूसरी ओर भारत में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा है कि सविता हलप्पानवार की त्रासद मौत पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हैं. किसी भारतीय नागरिक की ऐसी परिस्थिति में मौत चिंता का विषय है. डबलिन में हमारा उच्चायोग इस मामले में करीबी नजर रखे हुए हैं. अकबरूद्दीन ने कहा कि हम समझते हैं कि आयरलैण्ड के अधिकारियों ने दो जांच के आदेश दिए है. हम इनके परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं.


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