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लोकपाल के दायरे में आएंगे प्रधानमंत्री

लोकपाल के दायरे में आएंगे प्रधानमंत्री

नई दिल्ली. 20 नवंबर 2012

rajyasabha india


लोकपाल बिल पर बनी राज्यसभा सांसदों की प्रवर समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए. समिति ने प्रधानमंत्री को कुछ शर्तों के साथ लोकपाल के दायरे में रखने की बात करते हुए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, परमाणु उर्जा और खूफिया विभागों से जुड़े मुद्दों को लोकपाल से बाहर रखा है. समिति ने सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की एक अधिशासी समिति बनाने के बारे में कहा है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट के जरिए विपक्षी दलों और संप्रग के कुछ सहयोगी दलों की राज्य सरकारों को राज्यस्तरीय लोकायुक्त के संबंध में अपना खुद का कानून पारित करने की आजादी देने संबंधी मांग को भी मान लिया है. अपनी सिफारिश में समिति ने कहा है कि लोकपाल बिल पास होने के एक साल के भीतर ही सभी राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो जानी चाहिए. गौरतलब है कि केंद्रीय कानून के तहत राज्यों के लोकायुक्त के गठन के मुद्दे पर ही असहमति को लेकर लोकपाल विधेयक पिछले शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में अटक गया था.

अब माना जा रहा है कि बदलाव की नई सिफारिशों के साथ `लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2011'  को राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में ही राज्यसभा में पेश किया जा सकता है. उधर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने इन सिफारिशों पर कहा है कि सरकार लोकपाल का अपना स्वरूप लाने का विचार कर रही है जो कि सिर्फ कूड़ेदान में फेंके जाने के काबिल है. उन्होंने कहा कि सरकार का लोकपाल बिल भ्रष्टाचार को खत्म नहीं करेगा जबकि उनकी टीम द्वारा बनाया गया लोकपाल बिल ऐसा करने में कामयाब होता. अन्ना हज़ारे ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी टीम के द्वारा बनाया गया लोकपाल बिल स्वीकार नहीं किया जाता है वे अंदोलन करते रहेंगे.

 


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