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रिमशा से ईशनिंदा का मामला खारिज

रिमशा से ईशनिंदा का मामला खारिज

इस्लामाबाद. 20 नवंबर 2012

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कथित रूप से क़ुरान जलाने की अभियुक्त 14 वर्षीय ईसाई किशोरी रिमशा मसीह के ख़िलाफ़ ईशनिंदा का मामला नहीं चलेगा. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित हाईकोर्ट ने माना कि रिमशा के खिलाफ दर्ज मामला सही नहीं है. इसके बाद अदालत ने ईशनिंदा का मामला ख़ारिज कर दिया है.

गौरतलब है कि रिमशा को तीन महीने पहले अगस्त में गिरफ़्तार किया गया था. रिमशा के खिलाफ एक मौलवी हफ़ीज़ मोहम्मद ख़ालिद चिश्ती ने क़ुरान जलाने का आरोप लगाया था. मौलवी का कहना था कि उसने कुरान जलाते हुये रिमशा को देखा है. बाद में इस मामले ने तुल पकड़ा और रिमशा मसीह के खिलाफ ईशनिंदा का मामला दर्ज कर लिया गया. यहां तक कि कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने रिमशा की हत्या करने की भी मांग की थी.

अब जबकि अदालत की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि मौलवी हफ़ीज़ मोहम्मद ख़ालिद चिश्ती ने जानबूझ कर झूठ बोला था, मौलवी के खिलाफ ही झूठ बोलने का मुकदमा चलाये जाने की खबर है. पर रिमशा के ख़िलाफ़ कथित झूठे सुबूत देने का मुक़दमा चलाया जा रहा है. कट्टरपंथी मुस्लिमों से संभावित ख़तरे के मद्देनज़र रिमशा को बेहद कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था वाली जेल में रखा गया था. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, पाकिस्तान के संघीय मंत्रिमंडल में एकमात्र ईसाई मंत्री पॉल भट्टी ने पुष्टि की है कि हाईकोर्ट ने रिमशा को ईशनिंदा के आरोपों से बरी कर दिया है.

पाकिस्तान सरकार के मंत्रीमंडल में शामिल ईसाई मंत्री पॉल भट्टी ने कहा है कि इस मामले में न्याय हुआ है और अदालत ने इस देश के क़ानून को बरक़रार रखा है. अदालत की इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पाकिस्तान के लिए सकारात्मक छवि का संदेश जाएगा कि यहां सभी को न्याय मिलता है और समाज में सहिष्णुता है.


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