पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >आतंकवाद Print | Share This  

कसाब को फांसी पर लटकाया गया

कसाब को फांसी पर लटकाया गया

पुणे. 21 नवंबर 2012

अजमल कसाब


मुंबई हमले के आरोपी अजमल कसाब को बुधवार की सुबह साढ़े सात बजे पुणे की यरवडा जेल में फांसी पर लटका दिया गया. इससे पहले 2008 से मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में रखे गये कसाब को पुणे की यरवडा जेल में ले जाया गया था.

गौरतलब है कि 26/11 के मुंबई हमले के आरोपी अजमल कसाब की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने खारिज कर दी थी. अजमल कसाब उन 10 पाकिस्तानी आतंकियों में से एक था, जिन्होंने समंदर के रास्ते मुंबई में दाखिल होकर 26/11 हमले को अंजाम दिया था. 26 नवंबर 2008 की रात को अजमल कसाब और 9 अन्य आतंकवादियों ने मुंबई की दो होटलों, छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन, कामा अस्पताल, लियोपोल्ड कैफे और कुछ अन्य स्थानों पर हमला किया था. इन हमलों में 166 से ज्यादा लोग मारे गए थ और 300 अन्य घायल हुए थे. बाद में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में 9 आतंकी मारे गए थे जबकि अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था.

मई 2010 में अजमल आमिर कसाब को मुंबई की एक विशेष अदालत ने फांसी की सज़ा सुनाई थी. कसाब को भारतीय दंड संहिता की चार धाराओं के अंतर्गत फांसी की सज़ा सुनाई गई, जबकि एक धारा के अंतर्गत उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई. विशेष अदालत के जज टहिलायनी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कसाब एक किलिंग मशीन है और अगर उसके खिलाफ मौत की सज़ा नहीं सुनाई जाती है तो लोगों के न्याय पर से विश्वास उठ जाएगा. कसाब को हत्या, हत्या की साज़िश रचने, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आपराधिक गतिविधि निरोधक कानून के तहत मौत की सज़ा सुनाई गई थी. इससे पहले 3 मई 2010 को मुंबई की आर्थर रोड जेल में बनी विशेष अदालत ने कसाब पर लगे 86 आरोपों में से 83 आरोपों का सही पाया था.

अजमल कसाब ने सितंबर में राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी. इससे पहले 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को बेहद 'रेयर' बताकर कसाब की फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी. जस्टिस आफताब आलम और सी. के. प्रसाद ने मुंबई हमले में पकड़े गए एक मात्र जिंदा आतंकी कसाब के बारे में कहा था कि जेल में उसने पश्चाताप या सुधार के कोई संकेत नहीं दिखाए. वह खुद को हीरो और देशभक्त पाकिस्तानी बताता था. ऐसे में कोर्ट ने माना था कि कसाब के लिए फांसी ही एकमात्र सजा है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

DILEEP (DD) [dileeps685@gmail.com] Kanpur Nagar UP. - 2016-02-03 10:35:20

 
  Kasab Ne jo Kiya usse poora INDIA roya but itne din Kasab ki khatir Dari Kyu ki gyi. Thanks to all police officers who fight for people and peaceful country. And great Salute for who died in the victory act. Jai Hind, Jai Bharat.  
   
 

Ajay sharma [deeptradingcompany@gmail.com] kurukshetra - 2015-07-12 05:56:35

 
  very good. we proud indian justice.  
   
 

kuldeep mishra [kdeep9713@gmail.com] hardoi - 2014-01-31 07:58:47

 
  भारत में देर है अंधेर नहीं. 
   
 

Mohit ku. Shukla [Mohitradha91@rediffmail.com] - 2013-12-06 19:40:05

 
  कसाब के साथ जो भी हुआ वो बिल्कुल ठीक था. सलाम भारत और प्रणब मुखर्जी जी को. 
   
 

rakesh ranjan [rakeshranjan4545@gmail.com] madhepura,bihar - 2013-07-11 17:15:30

 
  फांसी भी उसके लिए कम सज़ा थी उसे तो इससे भी कड़ी सज़ा देनी चाहिए थी. वो इंसानियत के नाम पर धब्बा था. 
   
 

lalit chaturvedi [chaturvedil84@yahoo.com] ahmedabad - 2013-03-02 21:21:38

 
  अजमल कसाब को फांसी दी वो बहुत अच्छी बात है. राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने जो फैसला लिया वो अच्छी बात है लेकिन 2008 से 2012 तक इतना लंबा समय उसको रखा और उस पर जो खर्च किया वो एक आतंकीवादी के लिए कुछ ज्यादा ही दया भावना है. रोज खाने के लिए 23 रुपए मतलब 41975 रुपए? 
   
 

Kirti [kitzzyguys6@gmail.com] Bhilai - 2012-12-12 17:24:18

 
  कसाब जैसे दरिंदे को सजा दिलवाकर पूरे भारत के साथ जो न्याय हुआ है उसके लिए हमारे राष्ट्रपति जी को सलाम. उनके ही वजह से ये मुमकिन हो पाया. और बाल ठाकरे जी का भी बड़ा योगदान था जिन्होंने साबित किया कि हमारे देश को गुनहगारों का ऐसा हश्र किया जाना चाहिए और बुराई के खिलाफ उन्होंने आवाज़ उठाई थी बुराई के खिलाफ. 
   
 

chandrakant bharti [chandrkantbharti@gmail.com] bhopal - 2012-11-27 16:39:50

 
  जैसी करनी, वैसी भरनी. भारत में देर है, अंधेर नहीं. 
   
 

Irfan [Irfanansari739@gmail.com] Maharajganj - 2012-11-22 13:58:25

 
  कसाब ने जैसा कर्म किया उसे उसका वैसा ही फल मिला. 
   
 

मदनलाल वर्मा 'क्रान्त' [krantmlverma@gmail.com] ग्रेटर नोएडा २०१३१० (भारत) - 2012-11-22 09:28:46

 
  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मर्सी अपील ठुकराकर मृत्युदण्ड का रास्ता खोलने में जो तत्परता दिखायी और गृहमन्त्री सुशीलकुमार शिन्दे ने सारे मामले को यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गान्धी से भी गोपनीय रखकर जिस साहस का परिचय दिया उस पर मुझे ही नहीं पूरे देश को गर्व है इससे आतंकवाद पर अंकुश लगेगा.  
   
 

Rajesh [rajesh.inward@gmail.com] New Delhi - 2012-11-21 05:28:09

 
  सबसे अच्छी बात तो हमें प्रणव मुखर्जी की लगी कि जो हुआ अच्छा हुआ बहुत अच्छा हुआ आतंकवादियों को पता चल गया कि वो जो कर रहे हैं उसका अंजाम क्या होता है. जय भारत. 
   
 

sanjeev shrivastva [cbrsahara@gmail.com] chhibramau (Kannauj) - 2012-11-21 05:08:35

 
  Very good, we proud India. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in