पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >स्वास्थ्य Print | Share This  

चर्च ने कहा-गर्भपात अनैतिक पर..

चर्च ने कहा-गर्भपात अनैतिक पर..

लंदन. 21 नवंबर 2012

सविता हलप्पनवार


सविता हलप्पनवर की गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने से हुई मौत पर पहली बार चर्च ने कहा है कि गर्भपात अजन्मे बच्चे की सोच-समझकर की गई सीधी हत्या है और हर परिस्थिति में इसे अनैतिक माना जाएगा. पर सविता हलप्पनवर का मामला सामान्य गर्भपात से अलग है और चिकित्सा के दौरान अजन्मे बच्चे की जान-बूझकर हत्या नहीं की जाती. कैथलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ने कहा कि चर्च कभी नहीं कहता कि गर्भवती मां की जिंदगी से गर्भ में मौजूद बच्चे को ज्यादा महत्व दिया जाये.

गौरतलब है कि गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने से भारतीय मूल की डेंटिस्ट सविता हलप्पनवार की आयरलैंड के अस्पताल में हुई मौत के बाद अब आयरलैंड के गर्भपात कानून को लेकर बहस तेज हो गई है. 31 वर्षीय सविता हलप्पनवार की 28 अक्टूबर को उस समय मौत हो गई थी, जब चिकित्सकों ने उनका गर्भपात करने से इंकार कर दिया. परिवार वालों के अनुरोध के बाद भी कानून का हवाला देकर उनका गर्भपात नहीं किया गया और गर्भ में घाव के सड़ने की वजह से उनकी मौत हो गई.

सविता हलप्पनवार के पति प्रवीण हलप्पनवार का कहना था कि यूनिवर्सिटी अस्पतॉल गॉलवे में जब हम 17 सप्ताह की गर्भवती सविता को लेकर आये तो उनकी स्थिति खराब होने लगी थी. यह भ्रूण में किसी तरह की गड़बड़ी के कारण था. हमने चिकित्सकों को कहा कि सविता का गर्भपात कर दें लेकिन चिकित्सकों ने कैथोलिक देश के कानून का हवाला देते हुये ऐसा करने से मना कर दिया.

लगभग 20 साल पहले 'एक्स केस' का मामला सामने आने के बाद गर्भपात पर आयरलैंड में रोक लगा दी गई थी. इस मामले में स्कूल में पढ़ने वाली 14 साल की एक बच्ची बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई थी. बच्ची और उसके परिजन चाहते थे कि उसका गर्भपात करा दिया जाये. लेकिन आयरलैंड के स्थानीय प्रशासन ने गर्भपात की अनुमति नहीं दी. बाद में उस बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी. इस घटना के बाद अदालत ने कहा कि मां और भ्रूण दोनों को जिंदा रहने का समान अधिकार है लेकिन अगर मामला आत्महत्या तक पहुंच जाये तो गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिये.

अब सविता हलप्पनवार की मौत के बाद एक बार फिर गर्भपात के कानून को लेकर देश भर में बहस शुरु हो गई है. मानवाधिकार और महिला संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे. सरकार को यह बताना चाहिये कि किन परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है.

इधर गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने से सविता हलप्पनवर की हुई मौत के मामले में आयरिश सरकार ने उन चिकित्सकों को जांच दल से हटा दिया है, जो आरोपी अस्पताल में कार्यरत हैं. आयरलैंड के प्रधानमंत्री एंडा केन्नी ने सांसदों को बताया कि वैसे डॉक्टर जिनका गालवे यूनिवसिर्टी अस्पताल से कोई संबंध नहीं होगा, उन्हें ही जांच दल में शामिल किया जाएगा. प्रधानमंत्री का कहना है कि जांच की रिपोर्ट की विश्वसनीयता बनी रहे, इसलिये यह जरुरी है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in