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सविता की मौत के दस्तावेज गायब

सविता की मौत के दस्तावेज गायब

लंदन. 24 नवंबर 2012

सविता हलप्पनवार


गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने के कारण असमय मौत का शिकार हुईं सविता हलप्पनावर के पति प्रवीण ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी की मौत की जांच में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हैं. प्रवीण का आरोप है कि कागजातों में सविता का वह आवेदन ही गायब है, जिसमें गर्भपात का अनुरोध किया गया था. सविता की मौत की जांच उन दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है, जिसमें कंबल मांगने, चाय पीने और टोस्ट खाने का उल्लेख है. प्रवीण का कहना है कि 22 अक्टूबर का चिकित्सक का वह नोट भी गायब है, जिसमें गर्भपात को लेकर टिप्पणी की गई थी.

इधर आयरलैंड सरकार के एमॉन गिलमोर ने कहा है कि सविता की मौत की सार्वजनिक जांच की मांग पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है और इसे खारिज भी नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार सविता की मौत की जांच कर रही है और इस पर कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी.

गौरतलब है कि गर्भपात की अनुमति नहीं मिलने से भारतीय मूल की डेंटिस्ट सविता हलप्पनवार की आयरलैंड के अस्पताल में हुई मौत के बाद अब आयरलैंड के गर्भपात कानून को लेकर बहस तेज हो गई है. 31 वर्षीय सविता हलप्पनवार की 28 अक्टूबर को उस समय मौत हो गई थी, जब चिकित्सकों ने उनका गर्भपात करने से इंकार कर दिया. परिवार वालों के अनुरोध के बाद भी कानून का हवाला देकर उनका गर्भपात नहीं किया गया और गर्भ में घाव के सड़ने की वजह से उनकी मौत हो गई.

सविता हलप्पनवार के पति प्रवीण हलप्पनवार का कहना था कि यूनिवर्सिटी अस्पतॉल गॉलवे में जब हम 17 सप्ताह की गर्भवती सविता को लेकर आये तो उनकी स्थिति खराब होने लगी थी. यह भ्रूण में किसी तरह की गड़बड़ी के कारण था. हमने चिकित्सकों को कहा कि सविता का गर्भपात कर दें लेकिन चिकित्सकों ने कैथोलिक देश के कानून का हवाला देते हुये ऐसा करने से मना कर दिया.

लगभग 20 साल पहले 'एक्स केस' का मामला सामने आने के बाद गर्भपात पर आयरलैंड में रोक लगा दी गई थी. इस मामले में स्कूल में पढ़ने वाली 14 साल की एक बच्ची बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई थी. बच्ची और उसके परिजन चाहते थे कि उसका गर्भपात करा दिया जाये. लेकिन आयरलैंड के स्थानीय प्रशासन ने गर्भपात की अनुमति नहीं दी. बाद में उस बच्ची ने आत्महत्या कर ली थी. इस घटना के बाद अदालत ने कहा कि मां और भ्रूण दोनों को जिंदा रहने का समान अधिकार है लेकिन अगर मामला आत्महत्या तक पहुंच जाये तो गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिये.

अब सविता हलप्पनवार की मौत के बाद एक बार फिर गर्भपात के कानून को लेकर देश भर में बहस शुरु हो गई है. मानवाधिकार और महिला संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे. सरकार को यह बताना चाहिये कि किन परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है. इधर आयरिश सरकार ने इस मामले की जांच शुरु कर दी है और जल्दी ही उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का फैसला किया है. दूसरी ओर सविता के पति प्रवीण ने कहा है कि सविता हलप्पनवार की मौत की सार्वजनिक जांच की जाये.


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