पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >व्यापार >अर्थ-बेअर्थ Print | Share This  

लक्ष्मी मित्तल फ्रांस छोड़ो

लक्ष्मी मित्तल फ्रांस छोड़ो

पेरिस. 27 नवंबर 2012

लक्ष्मी मित्तल


भारतीय मूल के उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल को फ्रांस सरकार द्वारा देश से बाहर करने की योजना के बीच उनकी फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांको होलांद से होने वाली मुलाकात पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं. लक्ष्मी मित्तल पर आरोप है कि उन्होंने अपने उद्योग के लाभ के लिये सरकार से झूठ बोला. यही कारण है कि फ्रांस सरकार में औद्यौगिक मामलों के मंत्री अर्नोड मोंटेबर्ग किसी भी हालत में लक्ष्मी मित्तल को फ्रांस से बाहर निकालने पर तुले हुये हैं.

गौरतलब है कि लक्ष्मी मित्तल लॉरिन के फ्लोरेंज इलाके में चलने वाले अपने दो संयंत्रों को बंद करने की घोषणा कर चुके हैं. उनका कहना है कि ये दोनों संयंत्र घाटे में हैं. लेकिन मित्तल के ऐसा करने से इन दोनों संयंत्रों में काम करने वाले 629 लोग सड़क पर आ जाएंगे. इसके अलावा फ्रांस सरकार का दावा है कि ये संयंत्र लाभ की स्थिति में हैं.

फ्रांस सरकार के दावों से बेपरवाह लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि वे इन दोनों संयंत्रों को बेचेंगे ही. इसके बाद विवाद और गहराया. मित्तल यह जानते थे कि आर्थिक मंदी के इस दौर में यूरोप का कोई भी देश किसी कंपनी के साथ विवाद नहीं चाहेगा. लेकिन इसके उलट फ्रांस के औद्योगिक मामलों के मंत्री मोंटेबर्ग ने आदेश दिया कि अगर लक्ष्मी मित्तल इन दोनों संयंत्रों को बंद करना चाहते हैं तो उन्हें अपना सारा प्लांट बेचना होगा.

लक्ष्मी मित्तल को यह उम्मीद नहीं थी कि उनके साथ ऐसा होगा. इस स्थिति में उनके सामने अब फ्रांस के राष्ट्रपति से मुलाकात कर मामले को सुलझाने के अलावा कोई और तरीका नहीं बचा था. अब खबर है कि राष्ट्रपति फ्रांको होलांद भी अपने औद्योगिक मामलों के मंत्री की राय पर ही अपनी मुहर लगाने वाले हैं. हालांकि यह सब कुछ मित्तल के साथ होने वाली बैठक के बाद ही तय होगा.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

राजेश अग्रवाल [agrrajesh@gmail.com] बिलासपुर - 2012-11-27 18:35:01

 
  इससे हमारी सरकारों को सीखना चाहिए। विस्थापितों की बदहाली, रोजगार के नाम पर धोखा देने वाली ऐसी तमाम कंपनियों के लिए ये लाल कालीन बिछाते हैं।  
   
 

Aamir Pasha [pasha722@gmail.com] wardha - 2012-11-27 18:33:10

 
  मामला गंभीर है. इसमें कितनी राजनीति, निजी और राष्ट्रहित है, ये पता होना चाहिये.इस समाचार से तो मुझे लग रहा है कि मित्तल के साथ गलत हो रहा है. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in