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आकाश का क्या होगा ?

आकाश का क्या होगा ?

नई दिल्ली. बीबीसी. प्रशांतो के रॉय. 27 नवंबर 2012

टैबलेट आकाश-2


भारत ने दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट कंप्यूटर आकाश-2 लॉन्च कर दिया है और उम्मीद है कि आकाश-2 को सबसे बड़ा लाभ सरकार की उस योजना से होगा जिसके तहत सरकार अगले सात वर्षों में भारत के सभी 22 करोड़ छात्रों को एक टैबलेट देना चाहती है.

लगभग एक साल पहले आकाश-1 को लॉन्च किया गया था लेकिन उम्मीदों के विपरीत वो तकनीकी एतबार से कई मोर्चों पर विफल रहा था. उसकी तुलना में आकाश-2 बहुत पतला और हल्का है और उसका प्रदर्शन भी अब तक बहुत अच्छा रहा है. नवंबर 12 को भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसको लॉन्च किया था और ये टैबलेट केवल सरकार ही बेच सकेगी. कॉलेज छात्रों को ये टैबलेट सिर्फ़ 1130 रूपए में मिलेगा.

लंदन स्थित डेटाविंड नाम की कंपनी ने आकाश-2 को डिज़ाइन किया है जबकि भारत में इसको असेंबल किया जा रहा है. असेंबल करने के बाद इसे आईआईटी मुंबई भेजा जाता है जहां इसका परीक्षण होता है और आख़िर में इसे मानव संसाधन मंत्रालय के एक विशेष प्रोग्राम के तहत वितरित किया जाता है.

लॉन्च करने से पहले तीन महीनों तक इसका इस्तेमाल करने के बाद मैं कह सकता हूं कि आकाश-2 के हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर दोनों में काफ़ी सुधार हुआ है. सात इंच के मल्टी टच स्क्रीन डिस्प्ले और 292 ग्राम के वज़न के साथ ये टैबलेट आई-पैड मिनी और नेक्सस-7 से भी हल्का है. इसमें एक गीगा हर्ट्ज का प्रोसेसर लगाया गया है जो कि तीन गुना ज्यादा तेज़ी से काम करत है. मेमोरी और स्टोरेज क्षमता को भी बढ़ाकर 512 एमबी रैम और चार जीबी फ़्लैश कर दिया गया है.

कंपनी के दावे के मुताबिक़ इसकी बैट्री चार घंटे का बैकअप देती है. इसमें एंड्रॉयड 4.0 ऑपरेटिंग सिस्टम लगाया गया गया है. डेटाविंड कंपनी के मालिक सुनीत टुली के अनुसार इस समय उनकी कंपनी एक लाख टैबलेट का निर्माण कर रही है जो कि उसे साल के आख़िर तक पूरा करना है. सुनीत का कहना है कि जनवरी 2013 में भारत सरकार 50 लाख टैबलेट का ऑर्डर देगी और मार्च तक कंपनी को दस लाख टैबलेट मुहैया कराना होगा. इस सस्ते टैबलेट में लोगों की रूचि का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि डेटाविंड के अनुसार उनसे 40 लाख टैबलेट की मांग सिर्फ़ ऑनलाइन के ज़रिए की गई थी. लेकिन इन सबके बावजूद विशेषज्ञ अभी इसको पूरी तरह सफल बताने में हिचक रहे हैं.

विशेषज्ञों को कुछ मामलों में अभी आशंकाएं हैं. सबसे पहला ये कि इतनी अधिक संख्या में इसकी सप्लाई करना और भारत में इसको असेंबल करने के फ़ैसले पर लोगों की चिंता बनी हुई है. दूसरी ये कि इसके हार्डवेयर को लेकर अब भी चिंताएं बनी हुई हैं. इंजीनियरिंग के छात्रों को एक लाख टैबलेट सप्लाई करने के बाद शिक्षकों को इस टैबलेट के बारे में प्रशिक्षण देना बहुत कठिन होगा.

तीसरा और आख़िरी ये कि भारत के स्कूल और कॉलेजों में बिजली की काफ़ी कमी है और चार घंटे के बैट्री बैकअप के बावजूद पावर आउटलेट की बहुत ज़रूरत पड़ेगी. लेकिन इन सब चिंतांओं को दरकिनार करते हुए फ़िलहाल डेटाविंड कंपनी दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट बनाने में सफल हुई है. कंपनी की असल चुनौती आगे होगी जब उसे टैबलेट की ख़ूबियों को क़ायम रखते हुए समय पर उसकी सप्लाई देनी होगी.

सरकार की भी असल चुनौती बाद में शुरू होगी जब उसे 10 अरब डॉलर यानी कि लगभग पांच खरब रूपए की इस परियोजना के तहत हर छात्र को एक टैबलेट मुहैया कराने की चुनौती होगी.


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