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रॉबर्ट वाड्रा के घोटाले में पीएम की क्लिन चिट

रॉबर्ट वाड्रा के घोटाले में पीएम की क्लिन चिट

इलाहाबाद. 29 नवंबर 2012

रॉबर्ट वाड्रा


प्रधानमंत्री कार्यालय ने कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को डीएलफ जमीन घोटाला मामले में क्लिन चिट देते हुये कहा है कि इस मामले में कोई तथ्य नहीं हैं और केवल परेशान करने की नीयत से आरोप लगाये गये हैं. पीएमओ की ओर से यह जवाब इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकर की याचिका का जवाब देते हुये पीएमओ ने कहा कि रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ इस मामले को नकार चुके हैं.

गौरतलब है कि समाजसेवी अरविंद केजरीवाल और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी. तमाम दस्तावेजी सबूतों के साथ केजरीवाल और उनकी टीम ने आरोप लगाया कि रॉबर्ट वाड्रा ने 50 लाख की संपत्ति से केवल 3 साल में 300 करोड़ की संपत्ति बना ली.अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों में रॉबर्ट वाड्रा ने एक के बाद एक 31 संपत्तियां खरीदी हैं जिसमें से अधिकांश दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में हैं. इन संपत्तियों को खरीदने में वाड्रा को करोड़ो रुपए चुकाने पड़े हैं.

आरोपों के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां ने पांच कंपनियों का गठन 1 नवंबर 2007 के बाद किया. उन कंपनियों के बही-खातों और ऑडिट रिपोर्ट से पता चलता है कि इन कंपनियों की कुल शेयर पूंजी मात्र 50 लाख रुपए थी. इन कंपनियों के पास आय का एकमात्र वैध स्रोत था डीएलएफ द्वारा मिला ब्याज मुक्त कर्ज. इसके अलावा इन कंपनियों की आय का कोई वैध स्रोत नहीं है.फिर भी 2007 से 2010 के दौरान इन कंपनियों ने 300 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित की जिसकी कीमत आज 500 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है.

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर हाईकोर्ट ने पीएमओ से जवाब दायर करने को कहा था. प्रधानमंत्री के संयुक्त सचिव धीरज गुप्ता ने जवाब पेश करते हुये शपथ पत्र में कहा है कि सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स और विवादित तथ्यों के आधार पर कोई जांच कैसे कराई जा सकती है? पीएमओ का कहना है कि यह जनहित याचिका केवल सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक विद्वेष के कारण लगाई गई है.


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