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फेसबुक पर पुलिसगर्दी, सुप्रीम कोर्ट कड़क

फेसबुक पर पुलिसगर्दी, सुप्रीम कोर्ट कड़क

नई दिल्ली. 29 नवंबर 2012

फेसबुक


अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले दिनों में फेसबुक पर कुछ भी लिखने पर दारोगा आपके घर डंडा घुमाते पहुंच कर कार्रवाई करने से पहले सौ बार सोचेगा. माना जा रहा है कि दिल्ली की 21 साल की श्रेया सिंघल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आईटी एक्ट को लेकर कोई कड़ा दिशा-निर्देश जारी कर सकता है. दूसरी ओर केंद्र सरकार भी आईटी एक्ट में बदलाव करने के लिये काम कर रही है.

एक जनहित याचिका में कहा गया था कि आईटी एक्ट की धारा 66ए की शब्द रचना बहुत व्यापक और अस्पष्ट है. यह उद्देश्य का मानक निर्धारित करने में अक्षम है. यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1) (ए) और अनुच्छेद 21 के अनुरूप नहीं है. याचिका में कहा गया कि 66 (ए) असंवैधानिक बताया है. याचिका में कहा गया था कि अगर अभिव्यक्ति की आजादी के बारे में आपराधिक कानून पर अमल से पहले न्यायिक मंजूरी को जरूरी नहीं बनाया गया तो अंकुश लगाने के लिए इसका दुरुपयोग हो सकता है.

मुंबई में बाल ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी करने पर दो लड़कियों की गिरफ्तारी और इससे पहले ममता बनर्जी के खिलाफ कार्टून बनाने वाले प्रोफेसर महापात्रा समेत कुछ और उदाहरणों का उल्लेख करते हुये याचिका में कहा गया था कि आईपीसी की धारा 41 और 156 (1) के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के साथ तालमेल के लिए दिशा-निर्देश बनाए जाएं. इसके अलावा आईपीसी या किसी भी और कानून के तहत अगर कोई अपराध बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा हो, तो उसे धारा 41 और धारा 156 (1) के संदर्भ में गैर संज्ञेय अपराध माना जाए.

इस मामले पर सुनवाई करते हुये सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अलतमस कबीर की खंडपीठ ने कहा कि अदालत स्वयं इस मामले का संज्ञान लेने पर विचार कर रही थी. अदालत ने तहा कि अभी तक आईटी ऐक्ट के इस प्रावधान को किसी ने चुनौती क्यों नहीं दी? अदालत ने इस मामले में अटर्नी जनरल से राय मांगी है.


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