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नहीं रहे इंद्रकुमार गुजराल

नहीं रहे इंद्रकुमार गुजराल

नई दिल्ली. 30 नवंबर 2012

इंद्रकुमार गुजराल


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल का शुक्रवार को निधन हो गया. वे पिछले एक पखवाड़े से अस्पताल में भर्ती थे. पिछले महीने भी उनकी छाती में संक्रमण की बात सामने आई थी लेकिन ताजा मामले में तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका.

4 दिसंबर 1919 को पाकिस्तान के झेलम में पैदा हुये इंद्रकुमार गुजराल 21 अप्रैल 1997 से 18 मार्च 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री के पद पर रहे. इंद्रकुमार गुजराल की पहचान एक ऐसे प्रधानमंत्री के तौर पर थी, जिसने लेखन और रचनात्मकता को भी पर्याप्त स्थान दिया. इधर कई वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाले इंद्र कुमार गुजराल की उपस्थिति अरसे बाद अन्ना हजारे के आंदोलन में पिछले साल दर्ज की गई थी.

बीबीसी के अनुसार मौजूदा पाकिस्तान के लाहौर स्थित डीएवी कॉलेज से स्नातक गुजराल छात्र-राजनीति में भी सक्रिय रहे थे.अप्रैल 1964 में वे राज्य सभा के सदस्य बने थे. गुजराल के बारे में कहा जाता है कि वे उस गुट में शामिल थे जिसने इंदिरा गांधी को वर्ष 1966 में प्रधानमंत्री बनने में मदद की थी.

देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया गया था और प्रेस पर पाबंदी लगाई गई थी. तब गुजराल ही सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे. वे वर्ष 1989-1991 के दौरान लोक सभा के भी सदस्य रहे और लालू प्रसाद की मदद से वर्ष 1992 में एक फिर राज्य सभा के लिए चुने गए. अकाली दल की मदद से गुजराल पंजाब की जालंधर लोक सभा सीट से वर्ष 1998 में फिर लोकसभा पहुंच गए थे.

गुजराल सरकार ने उत्तरप्रदेश में वर्ष 1997 में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा की थी. तब केआर नारायणन भारत के राष्ट्रपति थे जिन्होंने इस अनुशंसा पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था. उनकी पत्नी शीला गुजराल का पिछले ही वर्ष निधन हुआ था जो साहित्य जगत से जुड़ी हुई थीं. उनके भाई सतीश गुजराल एक जानेमाने चित्रकार हैं. वे अपने पीछे दो बेटे छोड़ गए हैं जिनमें से एक नरेश गुजराल राज्य सभा सांसद हैं.

विदेश मंत्री के तौर पर गुजराल को उनकी विदेश नीतियों की वजह से खासतौर पर जाना जाता है. 'गुजराल-डॉक्ट्रिन' के नाम से प्रसिद्ध उनकी विदेश नीति भारत के पड़ोसी मुल्कों के साथ संबंधों को लेकर विदेशों में भी खासी चर्चा में रही.


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