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फ्रांस ने दी मित्तल को राहत

फ्रांस ने दी मित्तल को राहत

पेरिस. 1 दिसंबर 2012

लक्ष्मी मित्तल


विश्व की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी आर्सेलर मित्तल और फ्रांसिसी सरकार के बीच कंपनी के दो संयंत्रों को लेकर हुआ विवाद अब थमता दिख रहा है. फ्रांस सरकार ने भारतीय मूल के उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलर मित्तल के इस मामले में तात्कालिक रूप से राहत देते हुए संयंत्रों के राष्ट्रीयकरण का इरादा त्याग दिया है. इसके एवज में आर्सेलर मित्तल के प्रमुख लक्ष्मी मित्तल ने फ्रांस में कंपनी के फ्लोरेंस संयंत्र में 180 मिलियन यूरो के निवेश के साथ-साथ उसमें कार्यरत 629 श्रमिकों को नौकरी पर बनाए रखने का वादा किया है.

फ्रांस के प्रधानमंत्री बर्नाड आयरॉल्ट ने शुक्रवार को इस आशय में घोषणा करते हुए कहा कि फ्रांसिसी सरकार फ्लोरेंस के इस संयंत्र के स्थापित होने के बाद से ही मजदूरों के हितों की रक्षा करने के लिए काम कर रही है और चूंकि ऑर्सेलर मित्तल ने मजदूरों को नहीं निकालने का और संयंत्र में और निवेश करने का वादा किया है, सरकार ने इन दोनों संयंत्रों का राष्ट्रीयकरण न करने का निर्णय लिया है.

उल्लेखनीय है कि मशहूर उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलर मित्तल ने फ्रांस में चल रहे कंपनी के दो संयंत्रों को बंद करने की घोषणा की थी. कंपनी ने कहा था कि ये दोनो संयंत्र घाटे में है और ऐसे में उन्हें बेचना जरूरी है. कंपनी का मानना था कि आर्थिक मंदी के इस दौर में यूरोप का कोई भी देश किसी कंपनी के साथ विवाद नहीं चाहेगा. लेकिन इसके उलट फ्रांस के औद्योगिक मामलों के मंत्री मोंटेबर्ग ने आदेश दिया कि अगर लक्ष्मी मित्तल इन दोनों संयंत्रों को बंद करना चाहते हैं तो उन्हें अपना सारा प्लांट बेचना होगा.

इसके साथ है मोंटेबर्ग ने धमकी दी थी कि जब तक संयंत्र का कोई खरीददार नहीं मिल जाता है तब तक सरकार इन संयंत्रों का राष्ट्रीयकरण कर देगी. इसके बाद से ही आर्सेलरमित्तल इस मामले में बैकफुट पर थी. विवाद और बढ़ जाने के बाद लक्ष्मी मित्तल ने फ्रांसिसी राष्ट्रपति फ्रांको होलाद से मुलाकात की और मामले को सुलझाने का प्रयास किया. इस मुलाकात के बाद मित्तल के अधिक निवेश और नौकरियां बहाल रखने के वादे के मद्देनज़र फ्रांसिसी सरकार ने भी कंपनी को राहत देते हुए राष्ट्रीयकरण के फैसले को वापस लेने की घोषणा कर दी है.