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पत्नी से जबरन देह संबंध रेप नहीं

पत्नी से जबरन देह संबंध रेप नहीं

नई दिल्ली. 4 दिसंबर 2012

रेप


पत्नी से जबरन देह संबंध बनाने को अदालत ने रेप की श्रेणी में रखने से इंकार किया है. दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि विवाह में रेप जैसा कोई मामला नहीं होता. पत्नी से रेप के आरोप के मामले में आरोपी को बरी करते हुये अदालत ने कहा कि अगर शादी कानूनन सही है तो जबरन देह संबंध बनाये जाने को रेप नहीं माना जा सकता.

जिला जज जे.आर.आर्यन ने पत्नी से रेप के आरोपी हाजी अहमद सईद को बरी करते हुये कहा कि बचाव पक्ष के वकील के तर्क सही हैं. वकील का कहना था कि भारतीय दंड संहिता में 'वैवाहिक बलात्कार' जैसी कोई अवधारणा ही नहीं है. अदालत ने बचाव पक्ष के वकील से सहमति जताते हुये कहा कि यदि शिकायतकर्ता कानूनी तौर पर आरोपी से ब्याही गई है तो आरोपी और उसके बीच सेक्स रेप नहीं कहलाएगा. क्यों न सेक्स जबरन या उसकी इच्छा के बगैर हुआ हो.

असल में भारतीय कानून में पत्नी से जबरन देह संबंध को लेकर कोई साफ-साफ बात नहीं दर्ज है. हालांकि जबरन रेप को घरेलू हिंसा की श्रेणी में रखा जा सकता है लेकिन आईपीसी की धारा 375, 376 में इन बातों को जगह नहीं दी गई है. माना जा रहा है कि जिले की अदालत के इस फैसले को उपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

niki [] - 2012-12-04 12:28:43

 
  रेप का अभिप्राय - स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ देह संबंध बनाना, फिर चाहे वो विवाह के बाद ही किया गया हो, हर किसी को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करने का अधिकार है, शादी का मतलब सिर्फ शारिरिक रीप से औरत को अपनाना नहीं है, बल्कि मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक रूप से अपना बनाना भी है. 
   
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