पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

सूचकांक से कहीं ज्यादा बड़ी है भुखमरी

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >बहस >समाज Print | Share This  

पत्नी से जबरन देह संबंध रेप नहीं

पत्नी से जबरन देह संबंध रेप नहीं

नई दिल्ली. 4 दिसंबर 2012

रेप


पत्नी से जबरन देह संबंध बनाने को अदालत ने रेप की श्रेणी में रखने से इंकार किया है. दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि विवाह में रेप जैसा कोई मामला नहीं होता. पत्नी से रेप के आरोप के मामले में आरोपी को बरी करते हुये अदालत ने कहा कि अगर शादी कानूनन सही है तो जबरन देह संबंध बनाये जाने को रेप नहीं माना जा सकता.

जिला जज जे.आर.आर्यन ने पत्नी से रेप के आरोपी हाजी अहमद सईद को बरी करते हुये कहा कि बचाव पक्ष के वकील के तर्क सही हैं. वकील का कहना था कि भारतीय दंड संहिता में 'वैवाहिक बलात्कार' जैसी कोई अवधारणा ही नहीं है. अदालत ने बचाव पक्ष के वकील से सहमति जताते हुये कहा कि यदि शिकायतकर्ता कानूनी तौर पर आरोपी से ब्याही गई है तो आरोपी और उसके बीच सेक्स रेप नहीं कहलाएगा. क्यों न सेक्स जबरन या उसकी इच्छा के बगैर हुआ हो.

असल में भारतीय कानून में पत्नी से जबरन देह संबंध को लेकर कोई साफ-साफ बात नहीं दर्ज है. हालांकि जबरन रेप को घरेलू हिंसा की श्रेणी में रखा जा सकता है लेकिन आईपीसी की धारा 375, 376 में इन बातों को जगह नहीं दी गई है. माना जा रहा है कि जिले की अदालत के इस फैसले को उपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

niki [] - 2012-12-04 12:28:43

 
  रेप का अभिप्राय - स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ देह संबंध बनाना, फिर चाहे वो विवाह के बाद ही किया गया हो, हर किसी को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करने का अधिकार है, शादी का मतलब सिर्फ शारिरिक रीप से औरत को अपनाना नहीं है, बल्कि मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक रूप से अपना बनाना भी है. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in