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सपा-बसपा ने बचाई मनमोहन की नाक

सपा-बसपा ने बचाई मनमोहन की नाक

नई दिल्ली. 5 दिसंबर 2012

मनमोहन सिंह


एफडीआई यानी खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर लोकसभा में दो दिनों तक चली बहस के बाद यूपीए सरकार ने जीत हासिल कर ही ली. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सदन में सरकार की नीति के खिलाफ आग उगलते रहे लेकिन जब वोटिंग का समय हुआ तो दोनों ही दल सदन से वाकआउट कर गये, जिसका लाभ कांग्रेस पार्टी की सरकार को मिला.

गौरतलब है कि सुषमा स्वराज की ओर से मंगलवार को प्रस्ताव पेश किया गया था कि सरकार को खुदरा व्यापार में एफ़डीआई को वापस ले लेना चाहिए. इस पर मतदान में 218 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया मगर 253 सदस्यों ने सुषमा स्वराज के प्रस्ताव का विरोध किया. 42 सदस्यों वाली सपा-बसपा ने सदन से वाकआउट करते हुये कांग्रेस को इस चुनाव में मदद की. कुल 471 सांसदों ने वोट डाले और प्रस्ताव पारित कराने के लिए 236 वोट चाहिए थे. दूसरी ओर तृणमूल सांसद सौगत रॉय का भी फेमा में संशोधन के खिलाफ मंगलवार को प्रस्ताव गिर गया. इसके समर्थन में 224 मत पड़े, वहीं 254 मत इसके खिलाफ डाले गए. इस प्रस्ताव पर कुल 478 सांसदों ने मतदान किया.

वोट से पहले विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सरकार की खिंचाई करते हुये कहा कि 18 पार्टियों ने अपने मत रखे उनमें से 14 पार्टियों ने जोरदार तरीके से खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पुरजोर विरोध किया, केवल कांग्रेस, आरजेडी, एनसीपी और आरएलडी ने इसका समर्थन किया. उन्होंने कहा कि सदन में जिन पार्टियों ने एफडीआई का विरोध किया उनके सदस्य की संख्या 282 है और जिन पार्टियों ने एफडीआई की पैरवी की है उनके सदस्यों की संख्या है 224. सुषमा ने सरकार से सवाल किया कि किस पक्ष में है बहुमत दिख रहा है. सुषमा स्वराज ने कहा सरकार ने कहा था कि आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, कहां है वह आम सहमति.

सुषमा ने मुलायम सिंह और मायावती की पार्टियों के सांसदों के वॉकआउट पर कहा कि यह मामला सांप्रदायिक और गैर-सांप्रदायिक का नहीं है. उन्होंने कहा कि मामला सीबीआई बनाम एफडीआई का है. सुषमा ने कहा कि जब बहन मायावती प्रमोशन में रिजर्वेशन के लिए हमारा समर्थन मांगने आती हैं, तब हम सांप्रदायिक नहीं होते. इसलिए पूरा मामला सीबीआई के भय का है. उन्होंने कहा कि यही हाल डीएमके का है.

सुषमा ने अपने भाषण में कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा के भाषण पर चुटकी लेते हुये कहा कि दीपेंद्र, तुम किसान का बेटा होने का दावा करते हो. पहले यह तो जान लो कि लौकी और आलू में अंतर होता है. इससे पहले दीपेंद्र हुड्डा ने सदन में बोलते हुए कहा था कि पेप्सीको के लिए हरियाणा के किसान 24 इंच के आलू उपजाने के लिए तैयार हैं.

इसके बाद हुई वोटिंग में सुषमा स्वराज के प्रस्ताव पर यूपीए सरकार ने विजय हासिल कर ली.

वॉकआउट के बाद एफडीआई बोलने में हड़बड़ाने वाले सपा नेता मुलायम सिंह यादव आईएफडी, एनएफडी करते रहे और कहा कि सरकार की एफडीआई पर नीति से किसान परेशान है और पांच करोड़ खुदरा व्यापारी बर्बाद हो गए हैं, इसलिए पार्टी ने सदन का बहिष्कार करने का फैसला किया. उनसे पत्रकार कुछ सवाल पूछ पाते, उससे पहले ही वे रवाना हो गये.

इससे पहले आज सदन में बोलते हुये सीपीएम के बासुदेब आचार्य ने कहा कि सरकार को खुदरा में एफ़डीआई नीति के बारे में फिर से विचार करना चाहिए. इससे न तो किसान और न ही उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा. हम अपने देश में आसानी से वॉलमॉर्ट को नहीं आने देंगे.

आचार्य की तर्ज पर ही सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि वॉलमार्ट की मदद करने के लिए 120 करोड़ आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री सरकार की बलि चढ़ाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने सवाल किया क्या वॉलमार्ट की मदद करना वाकई इतना ज़रूरी है?

जनता दल युनाइटेड के शरद यादव ने सरकार पर बाजार समर्थक होने का आरोप लगाते हुये कहा कि हम सरकार को गिराना नहीं चाहते. अगर ऐसा होता तो हम अविश्वास प्रस्ताव पर तृणमूल का साथ देते. हमारा मकसद किसान को बचाना है. अगर सरकार एफ़डीआई रोलबैक नहीं करेंगे तो हम सरकार को रोलबैक करेंगे.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि विदेशी बैंकों की ही तरह वॉलमार्ट गांवों में नहीं जाएगा, वो शहरों में ही रहेगा. सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने की बात करती है लेकिन इससे किसानों की दुर्दशा होगी, उनकी आमदनी नहीं बढ़ेगी. दुनिया के धनी देशों के किसानों को सब्सिडाइज़ किया जा रहा है, आप उसकी सब्सिडी ख़त्म करने पर उतारू हैं. आप किसान को बढ़ाइए, वॉलमार्ट को नहीं बढ़ाइए.

एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने विपक्ष से सवाल पूछा कि उन्होंने देश में मॉल्स का विरोध क्यों नहीं किया. अपने संसदीय क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां चीनी फर्नीचर की दुकानें होने के बावजूद काम करने के लिए बढ़ई मिलना मुश्किल है. पटेल ने कहा कि आउटसोर्सिंग को लेकर, जिस सेक्टर में हमारे हज़ारों नौजवान काम कर रहे हैं, आज उसका अमरीका में विरोध हो रहा है. तो क्या आप चाहेंगे कि हमारे यहां से सॉफ्टवेयर का निर्यात बंद हो जाए? जितने उमंग से हम चाहते हैं कि हमारी वस्तुएं बाहर निर्यात हों, वही दूसरे देश के लोग भी चाहते होंगे. आज हमें बदलती हुई परिस्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए.

इधर सरकार की तरफ से फिल्डिंग करने को हर समय तैयार रहने वाले राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने कहा कि हम सरकार का समर्थन करते हैं और देश के किसानों और मजदूरों से अपील करते हैं कि वो भाजपा के झांसे में न आएं, वो देश को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती. उन्होंने विपक्ष को जमूरा भी बता दिया, जिसके बाद सदन में जम कर हंगामा हुआ और लालू की माफी के बाद ही बात आगे शुरु हो पाई.

वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि एफडीआई पर आम सहमति बनाने के लिए उन्होंने सभी राज्य सरकारों को चिट्ठी लिखी थी. 21 राज्यों ने जवाब दिया, 11 राज्यों ने खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पुरजोर समर्थन किया, जबकि 7 राज्यों ने विरोध किया था. भाजपा की सरकार वाली गुजरात और हिमाचल प्रदेश व एनडीए शासित पंजाब ने लिखित में विरोध नहीं किया. सबसे बड़ी बात है कि फैसला राज्यों पर थोपा नहीं जा रहा है, जिस राज्य की मर्जी न हो वे अपने यहां रीटेल चेन खोलने देने की इजाजत देने से इनकार कर सकते हैं.

वाणिज्य मंत्री ने विपक्ष के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे किसान और कारोबारियों को फायदा होगा. आनंद शर्मा ने कहा कि 2002 में भी रीटेल में एफडीआई को लेकर कैबिनेट में चर्चा हुई थी और उस समय एनडीए की सरकार थी. उन्होंने कहा कि ठीक है कि विचार बदलते हैं, राजनीतिक पार्टी होने के नाते भाजपा के पास इसका हक भी है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Ramesh chandra [rmshchandra07@gmail.com] B.s.city - 2012-12-06 03:53:24

 
  FDI will make the goods price high. Customers will be forced to buy on the makked price. The flow of dollar will ultimately make the peasant and workers to lead a hard life. 
   
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