पहला पन्ना >व्यापार > Print | Share This  

नौकरशाही के चलते पिछड़े भारतीय उद्योग

नौकरशाही के चलते पिछड़े भारतीय उद्योग

मुंबई. 8 दिसंबर 2012

ratan tata


प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा का मानना है कि केंद्र सरकार की निष्क्रीयता के कारण देश में पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा है और भारतीय कंपनियां अपने पाँव विदेशों में फैलाने के लिए मजबूर हैं. टाटा का कहना था कि सरकारी सहयोग में कमी की वजह से भारतीय उद्योग चीन से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं. टाटा समूह के निर्वतमान प्रमुख रतन टाटा ने ये विचार एक समाचार पत्र को दिए गए साक्षात्कार में व्यक्त किए हैं.

उनके अनुसार टाटा समूह ने दूसरे उभरते बाजारों में विस्तार की योजना इसीलिए बनाई क्योंकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नौकरशाही दूर करने में विफल रहे हैं. केंद्र की यूपीए सरकार पर एकजुट होकर काम ने करने का दोषी बताते हुए टाटा बोले कि हमारे यहां प्रधानमंत्री कार्यालय कुछ और बयान दे सकता है और उन्हीं की सरकार का मंत्री कुछ और, जबकि दूसरे देशों में ऐसा कुछ नहीं होता.

अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाते हुए रतन टाटा ने कहा कि हमारे यहां अलग-अलग एजेंसियां एक ही कानून का अलग-अलग मतलब निकालती हैं और उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं. उनके अनुसार टाटा समूह ने अपने नैतिक मूल्यों के कारण कारोबार में भारी कीमत चुकाई है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत सरकार यहां की कंपनियों को प्रोत्साहन और सहारा दे तो देश चीन से आराम से मुकाबला कर सकता है.