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नामधारी को कैसे मिले इतने हथियार

नामधारी को कैसे मिले इतने हथियार

नई दिल्ली. 11 दिसंबर 2012 अरविंद छाबड़ा. बीबीसी

पॉन्टी चढ्ढा


शराब कारोबारी पॉन्टी चड्ढा की हत्या के मामले में गिरफ्तार उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने गैर कानूनी तरीके से हथियार रखने के लाइसेंस बनवाए थे और इस काम में पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने उनका पूरा साथ दिया.

इसी तरह नामधारी ने फर्ज़ी राशन कार्ड पर जालंधर से पासपोर्ट बनवाया था. उन्होंने यह भी नहीं बताया था कि उनके खिलाफ उत्तरांचल में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. पंजाब सरकार की एक रिपोर्ट में यह सब सामने आया है. सरकार ने उनके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सरकारी और पुलिस अधिकारियों की उनसे साठगांठ थी जिसका नामधारी ने पूरा फायदा उठाया.

हालांकि नामधारी के वकील आरएस मलिक का कहना है कि यह सब आरोप एक साजिश के तहत उनके खिलाफ लगाए जा रहे हैं.

पिछले महीने दिल्ली के छतरपुर में एक फार्महाउस में हुई फायरिंग में पॉन्टी चड्ढा और उनके भाई हरदीप की मौत हो गई थी. उस समय कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों के बीच एक फार्महाउस की मिलकियत के बारे में मतभेद थे जिन्होंने एक सुबह हिंसक शक्ल ले ली थी. बाद में पुलिस का कहना था कि कुछ और सबूत और गवाहों से आधार पर नामधारी शक के घेरे में आए और उन्हें गिरफ्तार किया गया.
एक ही दिन में

पंजाब की जांच में सामने आया है कि जिस दिन नामधारी ने हथियार रखने के लाइसेंस की अर्ज़ी दी उसी दिन इसे कई अधिकारियों ने निपटा भी दिया. जांच की रिपोर्ट के मुताबिक सुखदेव सिंह ने 20 सितंबर 1994 को लाइसेंस के लिए रोपड़ के डिप्टी कमिश्नर को आवेदन किया.

उसी दिन एसएसपी को यह अर्ज़ी भेज दी गई और उसी दिन यह थानी प्रभारी के पास गई जो कि रिपोर्ट के अनुसार 'काफी असाधारण' बात है. ''इससे पता चलता है कि प्रभाव का इस्तेमाल कर के आवेदक को प्राथमिकता दी गई.''

इतना ही नहीं जिस एएसआई गुरचरण सिंह ने प्रमाण के तौर पर एक सतपाल के बयान लिए उसी ने इसे बतौर कुराली थाने के इंचार्ज के तौर पर प्रमाणित किया. फिर उन्होंने थाना प्रभारी के तौर पर एसएसपी को लाइसेंस बनाने की सिफारिश की. यानी कि पूरे मामले में एक ही अधिकारी ने कई अधिकारियों का काम किया और किसी अन्य अधिकारी को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया.

जांच में कहा गया है ''पुलिस की प्रमाणन में भारी अनियमितताएं साफ हैं.'' सुखदेव सिंह के अलावा उनके भाई समेत चार अन्य आवेदकों को हथियार रखने के लाइसेंस दिए गए. रिपोर्ट ने इनकी भी जांच की सिफारिश की है.

सुखदेव सिंह नामधारी ने इन सालों में तीन हथियार खरीदे जिनमें एक पिस्तौल, एक दुनाली बंदूक और एक 315 बोर की राइफल शामिल थी. साल 2005 में उत्तरांचल के उधम सिंह नगर में नामधारी ने कथित तौर पर एक संपत्ति छीनने में अपने हथियार का गलत इस्तेमाल किया था. जिसके बाद वहां के अधीक्षक ने उनका लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया.

रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने डुप्लिकेट लाइसेंस यानी दूसरी प्रति पहले अमृतसर से और फिर मोहाली से भी बनवाई थी. हालांकि नामधारी के वकील आरएस मलिक का कहना है, ''यह एक राजनीतिक मामला है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. मुझे नहीं पता कि इस सब के पीछे किसका दिमाग है लेकिन उनके लाइसेंस इतने पुराने हैं, यह पहले क्यों नहीं सामने आया? फिर भी मैं जब नामधारी से मिलूंगा तो सारी बात करूंगा.''


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