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मोदी के प्रचार का जिम्मा अमरीका की एप्को को

मोदी के प्रचार का जिम्मा अमरीका की एप्को को

अहमदाबाद. 11 दिसंबर 2012

नरेंद्र मोदी


स्वदेशी का नारा बुलंद करने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार-प्रसार का जिम्मा एक अमरीकन समूह एप्को के पास है. मोदी की लॉबिंग करने वाली यह कंपनी पिछले कई सालों से नरेंद्र मोदी की छवि बनाने के काम में जुटी हुई है. इस महाकाय कंपनी के ग्राहकों में दुनिया के कई देशों के बड़े उद्योगपति, मंत्री और राजा शामिल हैं.

एनबीटी के अनुसार एप्को ने वाइब्रेंट गुजरात समिट को प्रमोट करने का कॉन्ट्रैक्ट कई पब्लिक रिलेशंस (पीआर) कंपनियों को किनारे लगाकर हासिल किया. इन कंपनियों में अब बंद हो चुकी विवादास्पद कॉर्पोरेट लॉबीस्ट नीरा राडिया की वैष्णवी कम्युनिकेशंस भी शामिल है. वाइब्रेंट गुजरात समिट मोदी सरकार का सबसे बड़ा आयोजन होता है. हर साल होने वाले इस समिट का मकसद गुजरात में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है. मोदी ने इसे देश का प्रमुख निवेश कार्यक्रम बना दिया है. इसे 'भारत का दावोस' कहा जाने लगा है. मोदी वाइब्रेंट गुजरात समिट को मिली पब्लिसिटी का मौजूदा चुनाव प्रचार अभियान में इस्तेमाल कर रहे हैं.

नवभारत टाइम्स की खबर में दावा किया गया है कि मुंबई और दिल्ली समेत एप्को के दुनियाभर में 32 ऑफिस और करीब 600 एंप्लॉयी हैं. वह मोदी से अपने जुड़ाव पर चुप है. कागज पर एप्को गुजरात के इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ब्यूरो (इंडेक्सटीबी) के लिए काम करता है. इंडेक्सटीबी निवेश के लिए गुजरात सरकार की नोडल एजेंसी है. असल में एप्को नरेंद्र मोदी के पीआर का जिम्मा संभालता है. वाइब्रेंट गुजरात इंडेक्सटीबी का आयोजन नहीं, बल्कि मोदी का सबसे बड़ा शो है. 2010 में दुनियाभर में एप्को की कमाई थी 60 मिलियन डॉलर (3.27 अरब रुपये). आज वह 110 मिलियन डॉलर (लगभग 6 अरब रुपये) कमा रहा है. होम्स रिपोर्ट के एडिटर-इन-चीफ पॉल होम्स के मुताबिक, एप्को अमेरिका की दो या तीन सबसे बड़ी और बेहतरीन पब्लिक अफेयर्स (लॉबीइंग) कंपनियों में से एक है.

अखबार के अनुसार पब्लिसिटी के मामले में मोदी अनाड़ी नहीं हैं. गुजरात की सत्ता में उन्हें 11 बरस हो गए हैं. उन्होंने मीडिया में मजबूत सेल्फ-प्रमोशनल नेटवर्क खड़ा कर लिया है. कहा जाता है कि मोदी सरकार एप्को को हर महीने 25 हजार डॉलर (13.62 लाख रुपये) देती है. मोदी को लगता है कि अंतरराष्ट्रीय श्रोता और भारत में नीतिगत मामलों में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों का साथ विश्वसनीयता बढ़ाने और छवि चमकाने में मदद करता है. लेकिन 2002 के दाग मिटाना इतना आसान नहीं है. कुछ दिनों पहले 25 अमेरिकी सांसदों ने ओबामा प्रशासन से मोदी को वीजा नहीं देने की गुजारिश की है. बावजूद इसके एप्को मोदी के लिए अहम है क्योंकि अहम लोगों को साथ लाने में उसका रिकॉर्ड काफी अच्छा है.