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धर्मांतरण करके शादी अवैध

धर्मांतरण करके शादी अवैध

कोच्चि. 12 दिसंबर 2012

शादी


शादी के लिये फटाफट धर्मांतरण करने को लेकर केरल हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. अदालत ने इस तरह से किये गये धर्मांतरण के बाद की गई शादी को भी गैरकानूनी ठहराया है. एक मुस्लिम लड़के का धर्मांतरण करा कर बाद उसे पहले हिंदू बनाने और फिर हिन्दू लड़की से उसकी शादी कराने के मामले की सुनवाई करते हुये अदालत ने यह फैसला दिया. यह शादी विश्व हिन्दू परिषद ने मुस्लिम लड़के को हिन्दू धर्म में परिवर्तित कर करवाई थी. विश्व हिन्दू परिषद ने ही लड़के को धर्मांतरण का प्रमाण पत्र दिया था.

इस मामले में कोल्लम जिले के निवासी के शैजू एम ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी अश्वथ्य रवींद्रन को उसके परिवार वाले अपने साथ लेकर चले गये हैं. उसने कहा कि उसकी पत्नी अश्वथ्य रवींद्रन को उसके चाचा और पिता बिना उसकी मर्जी के अपने साथ ले कर गये हैं. अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शैजू एम ने इस्लाम को त्याग कर हिंदू धर्म अपनाया था और 14 नवंबर को उसने कलूर के श्री महादेव मंदिर में अश्वथ्य रवींद्रन से शादी की थी. लड़की अश्वथ्य रवींद्रन के पिता ने कहा कि लड़के ने शादी के लिये रातों-रात अपना धर्म परिवर्तन किया है लेकिन उनके सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक परिवेश में जमीन आसमान का फर्क है. ऐसे में इस विवाह को स्वीकार करना मुश्किल है.

इस मामले में अदालत ने कहा कि अदालत इस तरह के धर्मांतरण पर भरोसा नहीं कर सकती, वह भी तब जब किसी संगठन यानी विश्व हिंदू परिषद ने यह धर्मांतरण करवाया है. ऐसे धर्मांतरण से साफ है कि शादी को आसान बनाने के लिए धर्मांतरण को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया है जो कि कानून की नजर में अवैध है. अदालत ने इसके अलावा यह भी निर्देश दिया कि महिला तब-तक अपने माता-पिता के घर रह सकती है जब-तक की उसकी शादी स्पेशल मैरेज ऐक्ट के तहत विधिपूर्वक नहीं होती है. हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश नाबालिक शादी पर लागू नहीं होगा.


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