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किंगफिशर ने खोले अपने पत्ते

किंगफिशर ने खोले अपने पत्ते

नई दिल्ली. 14 दिसंबर 2012

किंगफिशर एयरलाइंस


शराब, आईपीएल और फैशन शो के बहुधंधी कामों में व्यस्त उद्योगपति विजय माल्या ने अपनी डूबती हुई कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को बचाने के लिये विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के लिये अपने पत्ते खोल दिये हैं. माल्या की कंपनी ने तय किया है कि किसी विदेशी कंपनी के लिये शेयरों में निवेश की अधिकतम सीमा तीन प्रतिशत होगी. अभी तक किंगफिशर एयरलाइंस में विदेशी संस्थागत निवेशकों की 2.46 प्रतिशत के स्तर तक हिस्सेदारी है.

गौरतलब है कि विजय माल्या की किंगफिशर पर करीब एक अरब चालीस करोड़ डॉलर का कर्ज़ है. 2005 में शुरु हुई किंगफिशर एयरलाइंस शुरु से ही घाटे में रही है. अब हालत ये है कि किंगफिशर एयरलाइंस को कर्जदाताओं ने आगे कर्ज देने को मना कर दिया है और कर्मचारी लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर है. किंगफिशर एयरलाइंस की कई उड़ाने बंद हो गई हैं. इसके बाद किंगफिशर एयरलाइंस ने अपनी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है. इसी सप्ताह किंगफिशर एयरलाइंस ने एक बयान जारी करते हुये कहा था कि कंपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई निवेशकों से बातचीत कर रही है. बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है और किसी तरह की डील नहीं हुई है.

अब किंगफिशर एयरलाइंस ने बांबे स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल एक फाइलिंग में 12 दिसंबर को हुई बाठक के बारे में यह जानकारी दी है कि कंपनी ने एफआईआई, क्यूएफआई या अन्य किसी गैर-रणनीतिक विदेशी निवेशक को मौजूदा तीन फीसदी से ज्यादा निवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. हालांकि एनआरआई यानी अनिवासी भारतीयों के इस दायरे से बाहर रखा गया है. किंगफिशर एयरलाइंस इस फैसले को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए रिजर्व बैंक को सूचित करने समेत सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

यहां यह उल्लेखनीय है कि 30 सितंबर, 2012 की स्थिति के मुताबिक, किंगफिशर एयरलाइंस में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 35.83 फीसदी, एफआईआई की 2.46 फीसदी, डीआईआई की 13.15 फीसदी व अन्य की हिस्सेदारी 48.56 फीसदी के स्तर पर थी.


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