पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

जी के संपादकों को जमानत

जी के संपादकों को जमानत

नई दिल्ली. 17 दिसंबर 2012

जी न्यूज


भारतीय टीवी चैनल ज़ी न्यूज के दोनों संपादकों सुधीर सौधरी और समीर अहलूवालिया को दिल्ली की निचली अदालत से राहत मिल गई है. दिल्ली के साकेत कोर्ट ने 50-50 हजार के निजी मुचलके पर दोनों को ज़मानत दे दी हालांकि कोर्ट ने संपादकों के विदेश दौरे पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने सुधीर और समीर को पासपोर्ट जमा कराने का आदेश दिया है.

माना जा रहा है कि दोनों को सोमवार देर शाम तक रिहा किया जा सकता है जो दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद थे. ज़ी न्यूज़ के दोनों वरिष्ठ पत्रकारों को कांग्रेस सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल से उगाही करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

इन दोनों पर उद्योगपति नवीन जिंदल से कोयला घोटाले पर ख़बर ना चलाने के लिए 100 करोड़ रुपए मांगने का आरोप है. उल्लेखनीय है कि जब सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया इस बारे में जिंदल ग्रुप के साथ बात कर रहे थे तब जिंदल ग्रुप ने उनका एक सीडी बना लिया था.

इस सीडी में दिखाया गया था कि ये पत्रकार पैसों की मांग कर रहे थे और कह रहे थे कि अगर उन्हें ये पैसा मिला तो वो जिंदल ग्रुप के बारे में नकारात्मक खबरें नहीं करेंगे. सुधीर चौधरी ने इन आरोपों को बकवास करार दिया था और कहा था कि ये चैनल पर दबाव बनाने का तरीका है.

इससे पहले नवीन जिंदल ने कहा था कि ज़ी के अधिकारी उनसे पिछले चार वर्षों से बीस करोड़ रुपए मांग रहे हैं जिसके बाद उन्होंने इस बैठक की चुपके चुपके सीडी बनाई थी. मामला सामने आने के बाद ज़ी टीवी ने जिंदल ग्रुप के ख़िलाफ़ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा किया था. जबकि जिंदल ने ज़ी के ख़िलाफ़ 200 करोड़ रुपए का दावा कर रखा है. उल्लेखनीय है कि कैग की रिपोर्ट में जिंदल समूह का नाम भी उन कंपनियों के साथ रखा गया है जिन्हें कोयला ब्लॉक आवंटन में फायदा पहुंचा है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in