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केवल दिल्ली की रेप का विरोध क्यों-अरुंधति राय

केवल दिल्ली की रेप का विरोध क्यों-अरुंधति राय

नई दिल्ली. 22 दिसंबर 2012

अरुंधति राय


सुप्रसिद्ध लेखिका अरुंधति राय का कहना है कि देश में कहीं भी रेप हुआ हो, उसका विरोध किया जाना चाहिये. उनका कहना है कि देश के दूसरे इलाकों में भी रेप की कई घटनायें हुईं, लेकिन उस मुद्दे पर कोई आवाज़ नहीं उठी. बीबीसी के साथ बातचीत में अरुंधति राय ने कहा कि लोगों की एक सामंती मानसिकता है, जो तभी आवाज़ उठाती है जब बड़ी जाति के, प्रभुत्व वाले लोगों के साथ दिल्ली में कुछ होता है.

अरुंधति राय ने कहा कि रेप मानसिकता में समाया हुआ है. गुजरात में मुसलमानों के साथ हुआ, कश्मीर में सुरक्षा बल करते हैं बलात्कार, मणिपुर में भी ऐसा होता है लेकिन तब तो कोई आवाज़ नहीं उठाता है. खैरलांजी में दलित महिला और उसकी बेटी का रेप कर के उन्हें जला दिया गया था. तब तो ऐसी आवाज़ नहीं उठी थी.

अरुंधति राय का कहना था कि रेप को लेकर बेशक विरोध होना चाहिये. दिल्ली में हुई रेप की घटना का भी विरोध किया जाना चाहिये. लेकिन ऐसा विरोध केवल मध्यम वर्ग के लोगों को बचाने के लिये ही नहीं होना चाहिये. उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर की सोनी सोरी का उदाहरण देते हुये कहा कि आदिवासी महिला सोनी सोरी के साथ भी कुछ हुआ था आपको याद होगा तो. उनके जननांगो में पत्थर डाले गए थे.पुलिस ने ऐसा किया लेकिन तब तो किसी ने आवाज़ नहीं उठाई थी. उस पुलिस अधिकारी को तो साहस का अवार्ड मिला.

अरुंधति राय ने कश्मीर में सुरक्षा बलों के अत्याचार का भी मुद्दा उठाते हुये कहा कि कश्मीर में जब सुरक्षा बल गरीब कश्मीरियों का रेप करते हैं तब सुरक्षा बलों के खिलाफ़ कोई फांसी की मांग नहीं करता. जब कोई ऊंची जाति का आदमी दलित का रेप करता है तब तो कोई ऐसी मांग नहीं करता.

उन्होंने कहा कि विरोध होना चाहिए लेकिन चुन चुन के विरोध नहीं होना चाहिए. हर औरत के रेप का विरोध होना चाहिए. ये दोहरी मानसिकता है कि आप दिल्ली के रेप के लिए आवाज़ उठाएंगे लेकिन मणिपुर की औरतों के लिए, कश्मीर की औरतों के लिए और खैरलांजी की दलितों के लिए आप आवाज़ क्यों नहीं उठाते हैं.

अरुंधति राय ने कहा कि बलात्कार एक भयंकर अपराध है जिस लड़की का रेप होता है उसे कोई स्वीकार क्यों नहीं करता. कई मामलों में जिसका बलात्कार होता है, उसी को परिवार के लोग घर से निकाल देते हैं. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे समाज में रहते हैं, जहां बहुत अधिक हिंसा है. हमें इस मानसिकता को बदलने की जरुरत है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ramesh kumar [rk140676@gmail.com] azamgarh - 2012-12-22 15:33:50

 
  अरुंधति का प्रश्न जायज है आखिर दिल्ली या एनसीआर में घटा घटना-दुर्घटनाओं को इतनी तवज्जो क्यों दी जाती है. सोनी सोरी, खैरलांजी वह दलित बेटी की इज्जत व राजस्थान की भंवरी देवी की अस्मिता इनसे कमतर क्यों है? 
   
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