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राज्य जल प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं-मनमोहन

राज्य जल प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं-मनमोहन

नई दिल्ली. 28 दिसंबर 2012

मनमोहन सिंह


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि केंद्र का जल प्रबंधन के मामले में राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं प्रस्तावित राष्ट्रीय कानूनी रूपरेखा को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत पर जोर देता हूं. यह रूपरेखा केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा व्यवहार में लाई जाने वाली विधायी, कार्यकारी और हस्तांतरित शक्तियों के सामान्य सिद्धांतों पर ही आधारित होगी. वे राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद की छठीं बैठक को संबोधित कर रहे थे, जिसमें नई राष्ट्रीय जल नीति के अपनाए जाने की संभावना है.

इधर राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा आठ प्रतिशत के विकास लक्ष्य से कम रहने पर टिप्पणी की गयी है. कुछ मुख्यमंत्रियों ने यह माना है कि विकास पर बाहरी दबावों का प्रभाव है. कुछ मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वे उच्चतर विकास दर का लक्ष्य रखेंगे और उनका यह दृंढ़ संकल्प स्वागत योग्य है. कुछ राज्यों ने औसत से बेहतर रहने की उम्मीद जताई है और उनके प्रयासों की भी सराहना की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि कई मुख्यमंत्रियों ने कृषि, ऊर्जा, अन्य बुनियादी ढ़ांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों की महत्ता पर जोर दिया है. 12वीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज इन प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं. कुछ मुख्यमंत्रियों ने पिछड़े राज्यों के साथ-साथ इन राज्यों के पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के साधन हैं. बीआरजीएफ के अंतर्गत 11वीं योजना में बड़ी संख्या में जिलों को विशेष सहायता मिली है. बिहार, उड़ीसा के केबीके जिले, मध्य प्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड जिले और हाल ही में प.बंगाल के लिए राज्य विशेष पैकेज हैं. योजना आयोग वर्तमान में बीआरजीएफ की संरचना को पुर्नगठित करने पर काम कर रहा है जो अगले वर्ष से प्रभाव में आ जाएगी. मनमोहन सिंह ने कहा कि अत्यंत पिछड़े जिलों की विशेष जरूरतों को पहचानने की मुख्यमंत्रियों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा.


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