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रेपिस्टों को नपुंसक बनाना संभव है?

रेपिस्टों को नपुंसक बनाना संभव है?

नई दिल्ली. 31 दिसंबर 2012 बीबीसी

रेप


बलात्कार के दोषियों को रासायनिक प्रक्रिया से नपुंसक बनाना कांग्रेस के उन प्रस्तावों में शामिल हैं जिन्हें वो जस्टिस जेएस वर्मा के नेतृत्व वाली समिति को सौंपेंगे. इस कमेटी का गठन केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर के दहला देने वाले सामूहिक बलात्कार के बाद किया था.

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बीबीसी को बताया, ''कांग्रेस जो प्रस्ताव रखेगी उन प्रस्तावों में इस प्रकार के कई विकल्प भी शामिल हैं लेकिन क्या निर्णय होता है उसके बारे में कांग्रेस पार्टी द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है.''

उन्होंने कहा, ''अंतिम सुझाव के विवरण के बारे में टिप्पणी करना अभी संभव नहीं है क्योंकि उनका अंतिम स्वरूप तभी सामने आएगा जब यह औपचारिक रूप से इस समिति को दिए जाएंगे.'' इस सामूहिक बलात्कार के बाद हुई इस महिला की मौत के बाद देश भर में आक्रोश देखने को मिल रहा है.

कई जगह से कानून को कड़ा करने की मांग आती रही है जिनमें केमिकल कैस्ट्रेशन यानी रासायनिक वंध्याकरण भी शामिल है.

न्यायमूर्ति वर्मा के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति का गठन वर्तमान कानूनों की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देने के लिए किया गया था ताकि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके. पीजीआई चंडीगढ़ के यूरोलोजी विभाग के डॉक्टर संतोष कुमार बताते हैं कि केमिकल कैस्ट्रेशन में मरीज़ को एक रासायनिक इंजेक्शन दिया जाता है जिससे वो एक तरह से नपुंसक बन जाता है.

वो कहते हैं, ''मरीज़ के 'टेस्टिस' यानी वीर्यकोष को निकाला नहीं जाता लेकिन वो काम नहीं कर पाता. उसके हॉरमोन नहीं बनते जिससे उसमें सेक्स की इच्छा नहीं रहती.'' उन्होने कहा, ''किसी भी कैस्ट्रेशन के दुष्प्रभाव होते हैं चाहे वो मेडिकल हो या रासायनिक. इससे हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं. खून की कमी होती है. मांसपेशियां कमज़ोर होती हैं और कई अन्य प्रभाव भी होते हैं.''

उन्होंने बताया कि उनकी संस्था में फिलहाल कैंसर को रोकने के लिए मेडिकल कैस्ट्रेशन किया जाता है.

डॉक्टर कुमार के मुताबिक ''मेडिकल कैस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है यानी उसके असर को उलटाया जा सकता है लेकिन केमिकल कैस्ट्रेशन को नहीं.'' ''इसमें रसायन की वजह से काफी नुकसान होता है हालांकि आप बाहर से एक्सोजनस हॉरमोन दे सकते हैं ताकि टेस्टास्टेरोन बन सकें.''

लेकिन क्या समाज भी इस तरह के कड़े फैसले के लिए तैयार है. समाजशास्त्री इस बारे में क्या सोचते हैं?

दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव कहते हैं, ''यह बिल्कुल बकवास सुझाव है. किसी ने कह दिया और किसी राजनेता ने मान लिया, ऐसा तो नहीं हो सकता.'' ''हम किसी समस्या के दीर्घावधि समाधान के बारे में सोचना नहीं चाहते हैं. इससे किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता.''

उनका कहना है, ''बलात्कार एक सामाजिक समस्या है. इसका रिश्ता इस बात से है कि हमारे यहां मर्दानगी के बारे में या औरतों के बारे में क्या सोचते हैं. केमिकल कैस्ट्रेशन से यह मानसिकता नहीं बदल सकती.'' वे कहते हैं, ''हमें समाजिक बदलाव की बात करनी होगी. इसका समाधान जैविक नहीं हो सकता.''

बहरहाल अभी समिति के पास अपनी सिफारिशें देने के लिए कुछ दिन बचे हैं. क्या उसके सुझाव आते हैं और कानून में बदलाव किए जाते हैं यह कुछ दिनों में सामने आएगा.


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