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भागवत और विजयवर्गीय के बयानों पर बवाल

भागवत और विजयवर्गीय के बयानों पर बवाल

नई दिल्ली. 4 जनवरी 2013


बलात्कार के मामलों के संबंध में लगातार आ रहे राजनेताओं के उलजुलूल और विवादास्पद बयान देने वालों में मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संचालक मोहन भागवत का नाम भी जुड़ गया है. समाचार चैनलों के संवाददाताओं से बात करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने महिलाओं को अपनी मर्यादा में ही रहने की सीख दे डाली.

विजयवर्गीय ने कहा कि समाज में बलात्कार के मामले तभी होते हैं जब मर्यादा का उल्लंघन होता है. उन्होंने कहा कि मर्यादा की एक लक्ष्मण रेखा होती है और जब भी मर्यादा की सीमा पार होती है, सीता का हरण रावण करता है. उन्होंने ऐसे मामलों की जिम्मेदारी पूरी तरह से महिलाओं पर डालते हुए कहा कि जो महिलाएं इस लक्ष्मण रेखा को पार करेंगी उन्हें इसी तरह से कीमत चुकानी पड़ेगी और ऐसी स्थिति को रोका नहीं जा सकता है.

वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संचालक मोहन भागवत ने भी बलात्कार संबंधी मामलों पर अपना अल्पज्ञान सामने लाते हुए कहा कि बलात्कार के मामले इंडिया में होते हैं भारत में नहीं. उनके भारत कहने का मतलब गांवों से था और इंडिया का शहरों. उन्होंने कहा कि शहरों में पश्चिमी सभ्यता का काफी असर है इसलिए वहां ऐसे मामले होते हैं जबकि गांव इनके अछूते हैं.

भागवत ने कहा, ''आप देश के गांवों और जंगलों में देखें जहां कोई सामूहिक बलात्कार या यौन अपराध की घटनाएं नहीं होतीं. यह शहरी इलाकों में होते हैं. महिलाओं के प्रति व्यवहार भारतीय परंपरागत मूल्यों के आधार पर होना चाहिए.''

भागवत और विजयवर्गीय के इन गैरजिम्मेदाराना बयानों की हर तरफ आलोचना हो रही है. सभी गैर-भाजपाई पार्टियों और समाजिक कार्यकर्ताओं ने ऐसे बयानों की आलोचना करते हुए अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोहन भागवत और कैलाश विजयवर्गीय को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि पता नहीं किस देश और समाज में यह लोग रहते हैं.

वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ममता शर्मा ने भी कहा है कि भागवत को ऐसे बयान देने से पहले गांवों में जाकर वहां की स्थिति को देखना चाहिए. मामले के तूल पकडने के बाद एक ओर भाजपा ने विजयवर्गीय के बयान को उनके निजी विचार कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है वहीं संघ से जुड़े नेताओं ने भागवत के बयान को अन्य अर्थों में न लेने की सीख देते हुए कहा है कि भागवत ने केवल इतना ही कहा है भारतीय परम्परा में महिलाओं का सम्मान होता रहा है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Yoginder Singh [] Delhi - 2013-01-04 12:35:19

 
  We should share the intention of Mr. Bhagwat. In the villages there is a tradition that any daughtor of the village is to be respected as sister by the boys of the village. I have taught as Professor and now left college teaching. Still, today if I meet any girl, daughtor of my village, I give her respect/honour as sister or Bua Ji/ father\\\'s sister, and as a symbol of respect give her 51 or 101 rupees. Even if she is accompanied by her Devrani (Wife of her Husband\\\'s brother) or her lady friend, then they are also respected as sisters. This is the tradition of the villages, which the we do not follow/ or it does on practically apply on bigger cities. Because in a small villages we know each of the village family due to the fact that our ancestors have been living there for long long time. If all citizens start reading Ram Charit Manas, which gives clear message that except our wife, we should treat all women as sisters or mothers. Bali was killed for having an evil eye of the wife of younger brother.
We must promote religius books study along with our modern studies, to inculcate high standards in our life. Books of Gita Press are very good, and should be taught to the growing generation.
 
   
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