पहला पन्ना >कला >बात Print | Share This  

टेबल नंबर-21 क्यों बनी एडल्ट

टेबल नंबर 21 क्यों बनी एडल्ट

मुंबई. 6 जनवरी 2013

टेबल नंबर-21


पिछले कुछ सालों में आये सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों में 'टेबल नंबर-21' एक ऐसी फिल्म है, जिसे देखते हुये बार-बार लगता है कि फिल्म टीवी के रियलिटी शो पर आधारित है, जिसमें जबरन अश्लील दृश्य डाल कर फिल्म को लोकप्रिय बनाने की असफल कोशिश की गई है. अच्छा यह है कि फिल्म का सस्पेंस अंत तक बरकरार रहता है और फिल्म की गति ऐसी है कि अधिकांश दर्शकों के अनुमान धरे रह जाते हैं. लेकिन फिल्म से कुछ खास हासिल करने की उम्मीद रखने वाले दर्शक इस फिल्म से दूर ही रहें तो अच्छा होगा. साफ सुथरी फिल्म देखने वालों को भी यह फिल्म बकवास लग सकती है. इस फिल्म को देखते हुये यह ख्याल भी बार-बार आता है कि इस फिल्म को घटिया मसाला फिल्म बनाने की कोशिश करके एडल्ट का सर्टिफिकेट पाने वाले निर्देशक को हासिल क्या हुआ ?

फिल्म में कुल जमा तीन किरदार हैं. पति-पत्नी की भूमिका में राजीव खंडेलवाल,टीना देसाई और उन्हें गेम खिलाने वाले रिसोर्ट के मालिक के रुप में परेश रावल. पति राजीव के पास नौकरी नहीं है और टीना नौकरी करते हुये लकी ड्रॉ में फिजी जाने का इनाम जीतती हैं. फीजी में परेश रावल उन्हें एक लाइव गेम खेलने का ऑफर देते हैं, जिसके बदले 25 करोड़ का इनाम भी रखा जाता है.

फिल्म के निर्देशक आदित्य दत्त की कोशिश रही है कि फिल्म ठीक-ठीक गति से चले और इसमें उन्हें सफलता पाई है. हालांकि फिल्म का संगीत बोर करने वाला है. परेश रावल जैसे एक्टर के सामने राजीव खंडेलवाल और किंगफिशर की कैलेंडरों की मॉडल टीना देसाई का अभिनय कमजोर लगता है लेकिन फिल्म की कहानी इस कमजोरी को ढकने की कोशिश करती रहती है. लेकिन फिल्म की कहानी ऐसी भी नहीं है कि इसके लिये समय निकाल कर फिल्म देखी जाये. हां, अगर आप बेहद फुर्सत में हों और सिनेमाहाल की कुर्सी पर झपकियां लेते हुये सुस्ताना चाहते हों तो बेशक फिल्म देख सकते हैं.