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बांग्लादेश में युद्ध अपराधी को फांसी

बांग्लादेश में युद्ध अपराधी को फांसी

ढाका. 21 जनवरी 2013 बीबीसी

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ऊर्फ बच्चू रजाकार


बांग्लादेश में एक युद्ध अपराध न्यायालय ने एक मुस्लिम धार्मिक नेता को 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मानवता के ख़िलाफ़ किए गए अपराधों के लिए फांसी की सज़ा सुनवाई है. अदालत ने 1971 के युद्ध के दौरान मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ऊर्फ बच्चू रजाकार को व्यक्तिगत तौर पर छह हिंदुओं को गोली मारने और महिलाओं का बलात्कार करने के लिए दोषी पाया है. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को दी गई सज़ा इस विवादित अदालत का पहला फ़ैसला है जिसे युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए बनाया गया है.

तीन साल पहले तैयार इस न्यायालय को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता हासिल नहीं है. मौलाना आज़ाद जमाते इस्लामी के सदस्य हैं और उनके मामले के सुनवाई उनकी ग़ैर मौजूदगी में हुई. ख़बरों के मुताबिक वो फिछले साल अप्रेल में पाकिस्तान भाग गए थे. जमाते इस्लामी ने बांग्लादेश के पाकिस्तान से अलग होने के ख़िलाफ़ मुहिम चलाई थी. संगठन पर आरोप था कि उसने आम लोगों के ख़िलाफ़ हुए अत्याचारों में या तो हिस्सा लिया या लोगों को उसके लिए उकसाया. उस पर कई बार पाकिस्तानी फ़ौज के साथ इनमें शामिल होने का इल्ज़ाम है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने कहा है कि नौ महीने की जंग के बीच पाकिस्तानी फ़ौज ने 30 लाख लोगों की हत्या की थी और क़रीब दो लाख महिलाओं का बलात्कार किया गया था. न्यूयार्क स्थित ह्यूमन राईट्स वॉच ने अदालत की कार्रवाही पर सवाल खड़े किए हैं. कहा गया है कि बचाव पक्ष के कई गवाह अदालत परिसर से ग़ायब हो गए.

विपक्षी नेता ख़ालिदा ज़िया ने अदालत को एक 'स्वांग' क़रार दिया है. उधर प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने ख़ालिदा ज़िया से आग्रह किया है कि वो उन लोगों का बचाव करना बंद कर दें जिन्होंने मुल्क की आज़ादी के ख़िलाफ़ काम किया था.


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