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आरबीआई ने घटाए रेपो रेट और सीआरआर

आरबीआई ने घटाए रेपो रेट और सीआरआर

नई दिल्ली. 29 जनवरी 2013

RBI


भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति में व्यपक बदलाव करते हुए रेपो रेट को घटाने की घोषणा की है. रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई बैंको को ब्याज देता है. आरबीआई के इस कदम से बैंको का ब्याज दर घटाना तय माना जा रहा है जिससे कर्जदारों की ब्याज दरों में भी कटौती होगी. यानी आरबीआई के इस कदम से सीधे आम आदमी को फायदा होगा और उसे पहले से कम ईएमआई चुकानी होगी.

चालू वित्त वर्ष की मौद्रिक नीति की आखिरी तिमाही समीक्षा पेश करने के साथ आरबीआई गर्वनर डी. सुबाबाराव ने इस बारे में बताया. आरबीआई ने रेपो रेट के अलावा नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी 0.25 प्रतिशत की कटौती की है, इसके फलस्परूप बैंको को पास ऋण उपलब्ध कराने के लिए अधिक नकद होगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी. सीआरआर दर घटने से बैंकिंग प्रणाली में लगभग 18000 करोड़ रुपए अतिरिक्त नकदी के रूप में उपलब्ध होंगे.

इस बारे में जानकारी देते हुए आरबीआई गर्वनर डी. सुब्बाराव ने कहा, ‘मुद्रास्फीति का जोखिम कम होने के मद्देनजर इस तिमाही समीक्षा में उचित ब्याज दर माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है.’

आरबीआई के इस कदम का उद्योग जगत और अर्थ जगत से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इससे आर्थिक वृद्धि दर में मजबूती आएगी. वहीं योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया का कहना रेपो रेट और सीआरआर कम करने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.


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