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एक और हरित क्रांति जरूरी : मनमोहन सिंह

एक और हरित क्रांति जरूरी : मनमोहन सिंह

नई दिल्ली 15 अगस्त 2009


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि देश को सर्वांगीण विकास हासिल करने के लिए एक बार फिर हरित क्रांति की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारत का खुशहाली उसके किसानों की खुशहाली के साथ जुड़ी है. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने यह विचार शनिवार को भारत की आज़ादी की 62वीं वर्षगांठ पर दिल्ली स्थित लाल किले से देशवासियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की जनता ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा दिखाते हुए लोकसभा चुनावों में सांप्रदायिक ताकतों को दरकिनार कर धर्मनिरपेक्ष सरकार को चुना. साथ ही उन्होंने देश की जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार देश के विकास के लिए पूरी लगन और मेहनत से काम करेगी. उनका मानना था कि देश का सम्पूर्ण विकास हर तबके की जनभागीदारी से ही संभव है.

आर्थिक विकास के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि वैश्विक मंदी के दौरान भी सरकार 9 फीसदी आर्थिक विकास दर बनाए रखने की कोशिश करेगी. देश के आर्थिक क्षेत्र में कृषि की महत्ता को देखते हुए उन्होंने किसानों को ऋण माफी देने, खाद्य सुरक्षा कानून बनाने, कृषि उत्पाद खरीद मूल्य बढ़ाए जाने की घोषणा के साथ उपज बढ़ाने के लिए जल संसाधनों का उचित उपयोग किए जाने की जरूरत बताई. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के दौरान 4 करोड़ गरीब परिवारों को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से फायदा हुआ है.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में शहरी और ग्रामीष क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं बेहतर बनाने और शिक्षा हेतु बेहतर सुविधाएं उपलहब्ध कराने संबंधित कानून बनाए जाने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा कि महामारी का रूप ले रहे स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार समन्वय के साथ काम करेगी. उन्होंने देश को झुग्गी झोपड़ी मुक्त करने राजीव आवास योजना और पर्यावरण की रक्षा करने 8 राष्ट्रीय मिशन बनाने की बात कही.

देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के विषय में उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही महिला आरक्षण बिल पास करेगी. साथ ही उन्होंने महिलाओं में निरक्षरता प्रतिशत आधे करने के संकल्प के साथ राष्ट्रीय महिला साक्षरता मिशन शुरु करने की बात कही. देश में लगातार विकराल रूप ले रही नक्सल समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों में तालमेल की बात कही. उन्होंने कहा कि बंदूक के दम पर राज नहीं किया जा सकता. उन्होंने विश्वास दिलाया की नक्सल समस्य़ा से निपटने के लिए केंद्र सरकार हरसंभव कदम उठाएगी. साथ ही उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ आर्थिक पिछड़ापन, असंतोष औऱ बेरोज़गारी है जिसे दूर करने के प्रयास किए जाने चाहिए.

भारत-पाक रिश्तों पर बोलते हुए श्री सिंह ने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ अमन और शांति से रहना चाहता है. और भारत पूरे दक्षिण एशिया के सामाजिक और आर्थिक हितों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश करेगा. उग्रवाद के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों जैसी घटनाओं के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को लगातार मज़बूत बनाया जा रहा है.


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