पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >न्यायपालिका > Print | Share This  

उच्चतम न्यायालय तय करेगा नाबालिग की परिभाषा

उच्चतम न्यायालय तय करेगा नाबालिग की परिभाषा

नई दिल्ली. 4 फरवरी 2013


उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर विचार करते हुए माना है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की समीक्षा कर नाबालिग को फिर से परिभाषित किए जाने की जरूरत है. किशोर न्याय (बच्चे की देखभाल और संरक्षण) कानून में किशोर की परिभाषा निरस्त करने के लिए वकील कमल कुमार पांडे और सुकुमार द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने इस मामले पर विचार करना स्वीकार किया है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जुवेनाइस जस्टिस एक्ट की धारा 2(के), 10 और धारा 17 तर्कहीन है और संविधान के प्रावधानों के खिलाफ भी है. उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून में प्रदत्त किशोर की परिभाषा कानून के प्रतिकूल है. भारतीय दंड संहिता की धारा-82 और 83 में किशोर की परिभाषा को बेहतर वर्गीकरण बताते हुए याचिकाकर्ताओं ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट को निरस्त किए जाने की मांग की है.

भारतीय दंड संहिता की धारा 82 के अनुसार सात साल से कम आयु के किसी बालक द्वारा किया गया कृत्य अपराध नहीं है जबकि धारा 83 के अनुसार सात साल से अधिक और 12 साल से कम आयु के ऐसे बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कृत्य अपराध नहीं है जो किसी कृत्य को समझने या अपने आचरण के स्वरूप तथा परिणाम समझने के लिए परिपक्व नहीं हुआ है.

अब न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर तीन अप्रैल को सुनवाई करने का फैसला किया है और अटॉर्नी जनरल को हलफनामा और इस मुद्दे से जुड़ी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.

उल्लेखनीय है कि गत 16 दिसंबर को दिल्ली में चलती बस में छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले में एक आरोपी नाबालिग सिद्ध हुआ था और इसी वजह से उसे सबसे कम सज़ा मिलेगी. बताया जा रहा है कि इसी आरोपी ने पीड़िता और उसके मित्र को सबसे ज्यादा निर्ममता से मारा था लेकिन चूंकि उसके 18 वर्ष का होने में कुछ महीने बाकी थे उसके खिलाफ केस जुवेनाइल बोर्ड में चलाया जाएगा. इस निर्णय के बाद से ही देशभर में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in