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डाक से भेजी थी फांसी की खबर

डाक से भेजी थी फांसी की खबर

नई दिल्ली. 9 फरवरी 2013

अफजल गुरु


केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने दावा किया कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बारे में उसके परिवार को तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने स्पीड पोस्ट के जरिए सूचित किया था और उसे फांसी पर लटकाए जाने से पहले जम्मू कश्मीर सरकार को भरोसे में ले लिया गया था. ईमेल, सेल फोन और तेज संचार की दुनिया में स्पीड पोस्ट से परिवार जनों को सूचना दिये जाने पर गृहसचिव ने कहा कि हमने जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक से यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि परिवार को यह डाक मिली या नहीं.

गौरतलब है कि संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु के भाई ने आरोप लगाया कि उन्हें फांसी दिये जाने की कोई सूचना नहीं दी गई. जब फांसी की खबर पता चला उस वक्त अफजल की पत्नी तबस्सुम गुरु श्रीनगर के एक नर्सिग होम में ड्यूटी कर रहीं थीं. अफजल गुरु के भाई मुश्ताक अहमद गुरु ने अफजल गुरु का शव मांगते हुये कहा है कि कश्मीर में क‌र्फ्यू लगने की वजह से वह एक दूसरे से मिल नहीं पा रहे हैं. कहीं भी जा नहीं सकते हैं.हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने माना कि दया याचिका खारिज होने की जानकारी अफजल के परिवार को दे दी गई थी. लेकिन फांसी की खबर किसी को नहीं दी गई थी.

2001 में संसद पर हुए आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी मोहम्मद अफज़ल गुरु को शनिवार तड़के तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया. सूत्रों के अनुसार अफज़ल गुरु को फांसी दिए जाने का फैसला शुक्रवार को हुई गृह मंत्रालय की एक अहम मीटिंग में लिया गया था. अफज़ल गुरु को फांसी देने के बाद एहतियातन तौर पर श्रीनगर में कर्फ्यू लगा दिया गया है और राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैय्यबा नामक आतंकवादी गुटों के पाँच आतंकवादियों ने देश की संसद पर आतंकी हमला कर दिया था. इस हमले में संसद की सुरक्षा में मौजूद दिल्ली पुलिस के पाँच जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल और दो सुरक्षा गार्ड शहीद हो गए थे. बाद में इन सभी आतंकवादियों को सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराया गया था.

पुलिस के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी अफज़ल गुरु इस मामले का मास्टर माइंड था जिसे पहले दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा साल 2002 में और फिर उच्चतम न्यायालय द्वारा 2006 में फांसी की सज़ा सुनाई गई थी. उच्चतम न्यायालय द्वारा भी फांसी सुनाए जाने के बाद गुरु ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका रखी थी, जिसे हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया था और फिर ये मामला गृह मंत्रालय के हाथ में ही था. शनिवार की सुबह जब अफजल गुरु को फांसी दे दी गई, उसके बाद यह खबर सार्वजनिक हुई. परिवार का आरोप है कि उन्हें फांसी के बाद ही इस बारे में पता चला.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Raju Jaihind [jaihind raju@yahoo.in] allahabad - 2013-02-10 21:25:05

 
  ..इन छद्म बौद्धिकों से मात्र एक सवाल \' संसद पर हमले का असली आरोपी \' कौन .?? ..हमला हुवा !! ..ट्विन टावर के हमले केठीक \' दो महिना और दो दिन बाद \' 13 दिसंबर 2001..अमेरिकी प्रतिक्रिया जग जाहिर है ..अर्थ -व्यवस्था रसातल में पहुँच रही है ..भारत भी \'आपरेशन पराक्रम \' कर चूका है ..अटल जी प्रधान मंत्री थे ..काश भारत भी अमेरिका जैसी गलती कर देता ..पूरा पाकिस्तान किन्तु आधा भारत तबाह हो जाता ..परम्परागत हथियारों का परमाण्विक युद्ध में बदलना क्षण भर की बात थी ...इन सब से सर्वाधिक लाभ किसका था .?? \" चाइना \" जिसका नाम लेने में राजनेता / पत्रकार भी हिचकते है ..अरुंधती का उद्देश्य कुछ स्पष्ट नहीं दिख रहा .?? ...पशुपति से तिरपति \' रेड कोरिडोर \' और धार्मिक उन्माद ग्रस्त \' अस्थिर भारत \' किसका हित सधेगा ..?? ...शुभ रात्रि ,, जयहिंद .!! 
   
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