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अफजल को फांसी के पीछे मोदी फैक्टर

अफजल को फांसी के पीछे मोदी फैक्टर

नई दिल्ली. 9 फरवरी 2013

अफजल गुरु


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एम एल ने कहा है कि अफजल को फांसी देने का निर्णय इंसाफ को फांसी देने की तरह है. पार्टी ने कहा कि अफजल को फांसी देने का निर्णय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की चाहत रखने वाली सांप्रदायिक शक्तियों को खुश करने के लिए ऐसा किया गया है और ऐसी ताकतों के मंसूबों को नाकामयाब करने की ज़रुरत है.

अफजल गुरु को लेकर जारी पार्टी के एक बयान में कहा गया है कि 1984 के सिख दंगों के लिए, 1992 के सूरत और उसके बाद 2002 के गुजरात दंगों सहित मुसलमानों के खिलाफ हुए तमाम दंगों के लिए, या फिर दलितों, आदिवासियों और अन्य पीड़ित तबकों के खिलाफ जनसंहार के लिए अभी तक किसी को फांसी नहीं दी गई.

सीपीआईएमएल ने कहा कि अफज़ल गुरु 1993 में बीएसएफ के समक्ष सरेंडर करने के बाद से कश्मीर के स्पेशल टास्क फोर्सेज़ के लिए काम कर रहा था. उसे संसद पर हुए हमले के मामले में फंसाया गया है. निचली अदालत में बिना किसी सुबूत के उसे दोषी ठहराया गया जबकि उस समय उसकी तरफ से कोई वकील तक नहीं था. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय समाज के विवेक को संतुष्ट करने के नाम पर उसकी मौत की सजा को बरकरार रखा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने निम्न स्तरीय जांच और संदिग्ध सुबूत पेश करने के लिए पुलिस को फटकार लगाई थी.

अफजल गुरु को फांसी दिये जाने के मुद्दे पर पार्टी ने कहा कि हर तरफ से विरोध का सामना कर रही कांग्रेस और यूपीए सरकार बीजेपी और सांप्रदायिक फासीवादी ताकतों की खुशामद करने के लिए बेचैन है. लेकिन देश का लोकतांत्रिक अवाम कांग्रेस और बीजेपी की इस सांठगांठ को ध्वस्त करेगा.

 


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