पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

वीरप्पन के साथियों की फांसी टली

वीरप्पन के साथियों की फांसी टली

नई दिल्ली. 20 फरवरी 2013

वीरप्पन


चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों की फाँसी की सज़ा फिलहाल टल गई है. इस मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अल्तमस कबीर ने कहा है कि फांसी पर माफ़ी से जुड़ा फैसला दूसरी पीठ के फैसले के बाद ही सुनाया जा सकता है. इसमें लगभग छह हफ्तों का समय लगने की उम्मीद है.इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को इनकी अपील पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद सोमवार को इस मामले में अदालत ने अपने संक्षिप्त फैसले में 20 फरवरी तक फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी.

कर्नाटक की टाडा अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को पलटते हुए 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने वीरप्पन के बड़े भाई ज्ञानप्रकाश के अलावा उसके साथियों साइमन, बिलवेंद्र और मीसकर मदैया को 1993 में 22 पुलिस कर्मियों को बारूदी सुरंग से उड़ा देने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई थी. इसी साल 13 फरवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चारों की दया याचिका खारिज कर दी. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दया याचिका निपटाने में देरी को आधार बनाते हुए सजा उम्रकैद में तब्दील करने का अनुरोध किया गया है.

इससे पहले आशंका जताई गई थी कि कसाब और अफज़ल गुरु के मामले में जिस तरह से फैसला लिया गया, उसी तरह रविवार को इन चारों को भी फांसी की सजा सुनाई जा सकती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद इनकी फांसी की सजा कम से कम बुधवार तक के लिये तो टल ही गई.

सोमवार को अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने देवेंदर पाल सिंह भुल्लर के मामले का हवाला देते हुए कहा कि उसकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित है. उस मामले में दया याचिका निपटाने में हुई देरी ही आधार है. इस तरह इन अभियुक्तों के साथ भी समान स्थितियां हैं. ऐसे में इन्हें फांसी दिया जाना न्यायसंगत नहीं होगा. दूसरी ओर अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने कहा कि तकनीकी मुद्दों के अलावा अपराध की गंभीरता को भी देखना जरुरी है. 22 पुलिस वालों की मौत को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह का मामला दूसरी खंडपीठ में लंबित है और जब तक उस पर फैसला नहीं होता, तब तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं किया जा सकता.