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काटजू का लेख पाकिस्तान में छपा

काटजू का लेख पाकिस्तान में छपा

नई दिल्ली. 25 फरवरी 2013

जस्टिस मार्कंडेय काटजू


जस्टिस मार्कंडेय काटजू के गुजरात पर छपे जिस लेख के कारण भाजपा ने उन पर हमला बोला था, अब वही लेख पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपा है. इस लेख का शीर्षक है मोदी और 2002 का जनसंहार. काटजू का यह लेख पाकिस्तानी अखबार में छपने के बाद भाजपा ने कहा है कि यह एक राष्ट्रविरोधी कदम है और लेख का प्रकाशन बताता है कि काटजू पाकिस्तान की शह पर बोलते है.

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने लिखा है कि- मोदी के समर्थक दावा करते हैं कि गुजरात में जो कुछ हुआ वह गोधरा में ट्रेन में 59 हिंदुओं की हत्या की तात्कालिक प्रतिक्रिया थी. मैं इस कहानी पर यकीन नहीं करता. पहली बात यह अभी भी रहस्य है कि गोधरा में क्या हुआ था. दूसरी बात जो लोग भी गोधरा कांड के दोषी थे, उनकी पहचान होनी चाहिए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलने चाहिए. लेकिन इससे गुजरात के मुस्लिम समुदाय पर हमले को कैसे जायज ठहराया जा सा सकता है?

इस लेख में काटजू ने आगे दर्ज किया है कि गुजरात की कुल आबादी में मुसलमान 9 पर्सेंट हैं. बाकी ज्यादातर हिंदू हैं. 2002 में मुसलमानों का नरसंहार किया गया, उनके घर जलाए गए और उन्हें कई तरीके से निशाना बनाया गया. 2002 में मुसलमानों की हत्या को तात्कालिक प्रतिक्रिया कहना नवंबर 1938 में जर्मनी के क्रिस्टालनाष्ट की घटना की याद दिलाता है.

काटजू ने लिखा है कि जब जर्मनी में पूरे यहूदी समुदाय पर हमला किया गया था. तब नाजी सरकार ने दावा किया था कि ये एक तात्कालिक प्रतिक्रिया थी. लेकिन सच्चाई यह थी कि नाजी शासन ने योजनाबद्ध तरीके से उन्मादी भीड़ का इस्तेमाल कर इस घटना को अंजाम दिया था. मैं भारत के लोगों से अपील करता हूं कि अगर वह वाकई भारत के बारे में चिंतित हैं तो इन बातों का ख्याल रखें.


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