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ईश्वर के और करीब पहुंचे वैज्ञानिक

ईश्वर के और करीब पहुंचे वैज्ञानिक

जेनेवा. 15 मार्च 2013

हिग्स बोसोन


पिछले साल जुलाई में वैज्ञानिकों ने लार्ज हैल्ड्रोन कोलाइडर परियोजना पर काम के दौरान जिस कण को हिग्स बोसोन के बतौर पाया था, वह ईश्वर कण ही है, इस बात की संभावना और बढ़ गई है. वैज्ञानिकों ने जिस हिग्स बोसोन यानी ईश्वर कण को तलाशा था, उसको लेकर लंबे समय से वैज्ञानिक यह मानते रहे हैं कि इसी हिग्स बोसोन के कारण कणों को भार मिलता है. अब सर्न प्रयोगशाला में इस पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने कहा है कि पिछले साल हमने सावधानी बरतते हुये कहा था कि हमने जिस कण को तलाशाने के बाद हिग्स जैसा कहा था, वह असल में बोसोन परिवार का ही है.

हाल ही में हुये इटली में मैरिओंड बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि वैज्ञानिकों ने जिस कण को तलाशा था, उसका 'घुमाव' हिग्स के अनुरूप ही दिखता है. वैज्ञानिक इस बात पर एकमत नहीं थे कि ये हिग्स किस तरह के हैं. अटलस और सीएमएस के दल ने इस कण को लेकर जो जानकारियां एकत्र की थीं, उसके अलावा भी कई सूचनाओं और जानकारियों का विश्लेषण किया गया.

सीएमएस के प्रवक्ता जो इंसादेला का कहना है कि 2012 के पूरे आंकड़ों के साथ शुरुआती नतीजे शानदार हैं और मेरे लिए ये स्पष्ट है कि हमारा वास्ता हिग्स बोसोन से पड़ रहा है, हालांकि ये समझने के लिए हमें लंबा सफर तय करना होगा कि ये किस तरह का हिग्स बोसोन है.

बीबीसी के अनुसार सूक्ष्माणुओं के इस समूह की पहचान कुछ खास गुण हैं जिनमें “घुमाव” और “एकरूपता” भी शामिल है. और नए कण के इन गुणों का स्पष्टता से निर्धारण ये तय करेगा कि क्या यही हिग्स है जिसकी लंबे समय से खोज की जा रही थी. इतना ही नहीं, सैद्धांतिक रूप से हिग्स के अलग अलग प्रकार अस्तित्व में हो सकते हैं. इसका सरलतम स्वरूप वैज्ञानिक सिद्धांतों को मजबूत करेगा और निश्चित तौर पर कण के अधिक 'आकर्षक' संस्करण विज्ञान में नए रास्ते खोलेंगे.

 

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Bhushan Markam [bhushan2919@gmail.com] Shubhash Ward Bhatapara Dist. BalodaBazar-Bhatapara (Chattish-Garh) India - 2013-03-15 14:39:09

 
  इसका सरलतम स्वरूप वैज्ञानिक सिद्धांतों को मजबूत करेगा और निश्चित तौर पर कण के अधिक \'आकर्षक\' संस्करण विज्ञान में नए रास्ते खोलेंगे. 
   
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